नवा रायपुर में राज्योत्सव की आखिरी शाम लोक संस्कृति, शास्त्रीय संगीत और बॉलीवुड के नाम रही
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 की आखिरी शाम नवा रायपुर का मेला परिसर गीत-संगीत और लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर रहा। एक ओर छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की मिठास थी तो दूसरी ओर बॉलीवुड के सदाबहार नगमों की गूंज। पंडवानी, पंथी नृत्य, कथक और सूफी संगीत की प्रस्तुतियों ने समापन की शाम को यादगार बना दिया।
अभिजीत के गानों पर झूमे दर्शक
बॉलीवुड के मशहूर गायक अभिजीत भट्टाचार्य ने अपनी लोकप्रिय आवाज से महफिल में जान डाल दी। उन्होंने ‘चांद तारे’, ‘बादशाह ओ बादशाह’, ‘बहुत खूबसूरत हो’ और ‘वादा रहा सनम’ जैसे लोकप्रिय गीत सुनाकर दर्शकों को पुराने फिल्मी दौर की याद दिला दी।
सुनील सोनी ने जगाया छत्तीसगढ़ी माटी का भाव
छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी ने अपनी प्रस्तुतियों में माटी, मां-बाप के सम्मान और प्रेम के भावों को आवाज दी। ‘छइयां भुइयां ला छोड़ तैं…’ और ‘झन भुलाव मां-बाप ला…’ जैसे गीतों ने श्रोताओं को भावुक किया। वहीं फिल्म ‘हंडा’ का गीत ‘ए गोरी ओ गोरी…’ सुनकर माहौल खुशनुमा हो गया।
उषा बारले की पंडवानी ने मोहा मन
प्रसिद्ध लोक कलाकार उषा बारले ने पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कथा गायन शैली की जीवंत झलक दिखाई। उनकी प्रस्तुति में लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रभाव साफ नजर आया।
शिल्प ग्राम में दिखे संस्कृति के दस रंग
शिल्प ग्राम के मंच पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए कलाकारों ने दस प्रस्तुतियां दीं। भजन, पंथी, लोकमंच, जसगीत-जगराता, जनजातीय नृत्य-संगीत, कथक, सूफी गायन और नाटक ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की विविधता से रूबरू कराया।
आस्था भट्ट, आरती बारले, दिनेश कुमार जांगड़े, पूर्णिमा साहू और अभिषेक सोनकर के दलों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। दीपाली पांडे के समूह और अनुष्णा रॉय चौधरी ने कथक की खूबसूरती दिखाई। वृद्धिमान वाचस्पति भारती ने सूफी संगीत और आनंद कुमार पांडे के दल ने नाट्य प्रस्तुति दी।
इस तरह राज्योत्सव की अंतिम शाम आधुनिक संगीत और छत्तीसगढ़ की लोक विरासत के खूबसूरत संगम के साथ संपन्न हुई।














