नई दिल्ली/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में 34 वर्षीय व्यक्ति श्रवण सूर्यवंशी की हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा आदेश दिया। कोर्ट ने राज्य पुलिस की जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपते हुए कहा कि मामले में FIR दर्ज करने में दो साल से अधिक की देरी हुई है। अदालत ने मृतक के परिवार को अंतरिम राहत के तौर पर 25 लाख रुपये देने का भी निर्देश दिया है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि व्यक्ति की मौत जनवरी 2024 में हुई थी, जबकि राज्य पुलिस ने इस मामले में 30 जुलाई 2026 को FIR दर्ज की। अदालत ने माना कि इतने लंबे समय बाद राज्य पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई जांच की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

शराब रखने के आरोप में हिरासत में लिया गया था

पुलिस ने बिलासपुर जिले के सीपत थाना क्षेत्र के श्रवण सूर्यवंशी को 18 जनवरी 2024 को उसकी किराना दुकान के बाहर बिक्री के लिए शराब रखने के आरोप में हिरासत में लिया था। इसके तीन दिन बाद 21 जनवरी को अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की जांच रिपोर्ट में मौत की वजह सिर पर किसी कुंद हथियार से लगी चोट के बाद उत्पन्न जटिलताओं को बताया गया था। इसके बाद मृतक की पत्नी और बेटियों ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाई कोर्ट से नहीं मिली जांच की अनुमति

हाई कोर्ट ने मृतक के परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया था। हालांकि, अदालत ने मामले की अलग से जांच के निर्देश नहीं दिए। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के उस निष्कर्ष पर छत्तीसगढ़ सरकार ने भी आपत्ति नहीं की है कि मृतक परिवार का अकेला कमाने वाला था और उसकी मौत राज्य की हिरासत में रहने के दौरान हुई हिंसा के कारण अप्राकृतिक परिस्थितियों में हुई।

जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया कि जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए। अदालत ने कहा कि जांच में हिरासत के दौरान हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई और अभियोजन किया जाए।

पीठ ने राज्य के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच के दायरे में रखने का आदेश दिया। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद भी अधिकारियों ने समय पर उचित कदम क्यों नहीं उठाए।

अदालत ने कहा कि न्याय के हित में हिरासत में हुई मौत की परिस्थितियों की जांच CBI से कराया जाना आवश्यक है। साथ ही मृतक के परिवार को अंतरिम मुआवजे के रूप में 25 लाख रुपये दिए जाएंगे। अंतिम मुआवजे की राशि का निर्धारण मामले की आगे की सुनवाई में किया जाएगा।

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