रायपुर समेत मेडिकल कॉलेजों में नियमित OPD का बहिष्कार, 28 सितंबर से इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित करने की चेतावनी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन अब अगले चरण में पहुंच गया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की ओर से मांगों के समाधान के लिए दिया गया सात दिन का समय पूरा होने के बाद भी लिखित आदेश जारी नहीं होने पर जूनियर डॉक्टरों ने नियमित ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार शुरू कर दिया है। हालांकि मरीजों को पूरी तरह इलाज से वंचित न होना पड़े, इसके लिए डॉक्टरों ने धरना स्थलों पर ही समानांतर ओपीडी शुरू कर दी है।
रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर समेत प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न, रेजिडेंट, पीजी बॉन्डेड और एमबीबीएस बॉन्डेड डॉक्टर आंदोलन में शामिल हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) का कहना है कि सरकार से बातचीत और आश्वासन के बावजूद अब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट लिखित निर्णय सामने नहीं आया है।
अस्पताल की ओपीडी बंद, धरना स्थल पर मरीजों का इलाज
गुरुवार को डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों की नियमित ओपीडी का बहिष्कार किया। इसके साथ ही मरीजों की परेशानी को देखते हुए आंदोलन स्थल पर समानांतर ओपीडी संचालित की गई। यहां मरीजों की जांच, चिकित्सकीय परामर्श और जरूरी उपचार किया गया।
JDA का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं है। संगठन के अनुसार मरीजों की चिकित्सा उनकी प्राथमिकता है, इसलिए नियमित ओपीडी के बहिष्कार के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए उन्हें चिकित्सकीय सुविधा देने की कोशिश की जा रही है।
सात दिन पहले टाल दी गई थी अनिश्चितकालीन हड़ताल
जूनियर डॉक्टरों ने पहले 21 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया था। स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई बैठक के बाद सरकार ने मांगों के निराकरण के लिए सात दिन का समय मांगा था। इसके बाद JDA ने प्रस्तावित हड़ताल टाल दी थी और इस दौरान सांकेतिक विरोध जारी रखा था।
JDA ने इस अवधि में अपनी मांगों का विस्तृत लिखित प्रस्ताव भी सरकार को सौंपा। संगठन का कहना है कि सात दिन की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी उन्हें मांगों पर कोई स्पष्ट लिखित आदेश नहीं मिला। इसके बाद आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला किया गया।
इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ा, लेकिन आंदोलन जारी
इसी बीच राज्य सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों के MBBS इंटर्न का मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने का आदेश जारी किया है। नई दर 1 अक्टूबर से लागू होगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के मुताबिक स्टाइपेंड संशोधन को वित्त विभाग की सहमति के बाद मंजूरी दी गई है। हालांकि JDA का कहना है कि यह निर्णय केवल MBBS इंटर्न के स्टाइपेंड से संबंधित है, जबकि उनकी मांगें इससे कहीं व्यापक हैं। संगठन ने इंटर्न के साथ PG रेजिडेंट, बॉन्डेड डॉक्टर और अन्य श्रेणियों के मानदेय में संशोधन की मांग की है। इसलिए केवल इंटर्न स्टाइपेंड में बढ़ोतरी के बावजूद आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।
बॉन्ड व्यवस्था में बदलाव और सुपर स्पेशलिटी कैडर प्रमुख मांग
जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में चिकित्सा शिक्षा से जुड़े बॉन्ड सिस्टम में सुधार भी शामिल है। JDA के अनुसार MBBS और PG डॉक्टरों पर लागू सेवा संबंधी शर्तों और आर्थिक दायित्वों की समीक्षा की जरूरत है। संगठन ने बॉन्ड की अवधि, राशि और सेवा शर्तों को अधिक व्यावहारिक बनाने की मांग की है। JDA का दावा है कि कुछ मामलों में बॉन्ड की वित्तीय देनदारी करीब 75 लाख रुपये तक पहुंचती है।
इसके अलावा प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी कैडर बनाने की मांग भी आंदोलन का अहम हिस्सा है। डॉक्टरों का कहना है कि लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट तथा गंभीर कैंसर जैसी जटिल बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े, इसके लिए प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों का मजबूत कैडर जरूरी है।
28 सितंबर से इमरजेंसी सेवाओं पर भी असर की चेतावनी
JDA ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। संगठन के मुताबिक यदि शेष मांगों पर जल्द ठोस और लिखित निर्णय नहीं हुआ तो 28 सितंबर से PG रेजिडेंट, MBBS इंटर्न, बॉन्डेड मेडिकल ऑफिसर और सीनियर रेजिडेंट इमरजेंसी सेवाओं से भी अलग हो सकते हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।
इससे पहले JDA ने 17 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की थी। इनमें विभिन्न श्रेणियों के डॉक्टरों के स्टाइपेंड और मानदेय में संशोधन, बॉन्ड से जुड़े मुद्दों का समाधान तथा चिकित्सा सेवाओं से संबंधित अन्य लंबित मांगें शामिल हैं।
लिखित आदेश पर अड़ा JDA
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि बातचीत और मौखिक आश्वासन के बाद अब वे ठोस लिखित निर्णय चाहते हैं। सरकार की ओर से MBBS इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का फैसला सामने आया है, लेकिन संगठन के मुताबिक बाकी मांगों पर भी स्पष्ट आदेश आने तक आंदोलन जारी रहेगा।














