रेल मदद से शिकायतों पर होगी बेहतर निगरानी
रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) ने सम्मेलन में GRP कर्मियों को रेल मदद मंच से जोड़ने की पहल की जानकारी दी। इसका उद्देश्य यात्रियों की शिकायतों के निपटारे को अधिक प्रभावी बनाना, सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान करना और शिकायतों की निगरानी में सुधार करना है।
इस व्यवस्था से यात्रियों की समस्याओं पर संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ड्रोन निगरानी और महिला सुरक्षा दल का मॉडल
दक्षिण मध्य रेलवे ने महिला सुरक्षा पर केंद्रित ‘पिंक पेट्रोल : आसमान से निगरानी, जमीन पर शक्ति’ मॉडल प्रस्तुत किया। इसमें ड्रोन के जरिए निगरानी के साथ ‘शक्ति’ ढांचे के तहत त्वरित कार्रवाई करने वाले दलों को शामिल किया गया है।
इस मॉडल का उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने की व्यवस्था को मजबूत करना है।
ट्रेनों पर पत्थरबाजी रोकने के लिए संयुक्त रणनीति
सम्मेलन में ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की घटनाओं को गंभीर चुनौती माना गया। इससे निपटने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने, निगरानी मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर जोर दिया गया।
इसके साथ ही युवाओं के बीच जागरूकता अभियान चलाने तथा RPF और GRP के बीच बेहतर तालमेल बनाने की जरूरत बताई गई। इस तरह की घटनाओं की रोकथाम में स्थानीय समुदाय की भागीदारी और जनजागरूकता को भी अहम माना गया।
दिवाली-छठ पर भीड़ प्रबंधन की तैयारी
त्योहारी सीजन में दिवाली और छठ के दौरान रेलवे स्टेशनों पर बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के उपायों पर भी चर्चा हुई। उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने दिल्ली पुलिस, GRP और दिल्ली मेट्रो के साथ मिलकर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
इनमें सीसीटीवी से निगरानी, सार्वजनिक उद्घोषणा, बैरिकेडिंग, यात्रियों के लिए निर्धारित प्रतीक्षा क्षेत्र और विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित करना शामिल है। सम्मेलन में भीड़ का दबाव बढ़ने से पहले योजना तैयार करने, यात्रियों की आवाजाही व्यवस्थित रखने और सुरक्षा बलों की समन्वित तैनाती पर जोर दिया गया।
पटरियों के पास रहने वाले बच्चों के लिए ‘प्रोजेक्ट दिशा’
मध्य रेलवे के पुणे मंडल ने ‘प्रोजेक्ट दिशा’ की जानकारी दी। इस पहल के तहत रेलवे पटरियों के आसपास रहने वाले बच्चों को शैक्षणिक और मनोरंजक गतिविधियों के जरिए रेल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है।
इस अभियान में गैर-सरकारी संगठनों (NGO), राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी ली जाती है। इसका उद्देश्य बच्चों में सुरक्षित व्यवहार की समझ विकसित करना और पत्थरबाजी, चोरी, अनधिकृत रूप से रेलवे परिसर या पटरियों में प्रवेश जैसी घटनाओं को रोकना है।
संयुक्त प्रशिक्षण और डिजिटल साक्ष्यों पर जोर
सम्मेलन में RPF और GRP के संयुक्त प्रशिक्षण, तोड़फोड़ की घटनाओं की रोकथाम और मादक पदार्थों की बरामदगी से जुड़ी सूचनाओं को तत्काल साझा करने पर भी विचार किया गया।
इसके अलावा डिजिटल साक्ष्यों के प्रबंधन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) को अपनाने, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, जांच क्षमता बढ़ाने और जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया।
तकनीक के साथ यात्रियों का भरोसा जीतना जरूरी
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश कुमार ने रेलवे अधिकारियों, RPF, GRP और राज्य पुलिस के बीच आपसी समन्वय को सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी बताया। उन्होंने तकनीकी विकास और नवाचार के बेहतर इस्तेमाल के साथ यात्रियों का भरोसा जीतने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पुलिसिंग का तरीका विनम्र और पेशेवर होना चाहिए। तकनीक और नवाचार के जरिए कामकाज की दक्षता तथा उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत भी रेखांकित की गई।
खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई पर जोर
सम्मेलन की अध्यक्षता RPF की महानिदेशक सोनाली मिश्रा ने की। इसमें रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं CEO, बोर्ड के अन्य सदस्य और विभिन्न राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के GRP प्रमुख शामिल हुए।
समापन संबोधन में सोनाली मिश्रा ने रेलवे सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिसिंग (Intelligence-led Policing) को जरूरी बताया। सम्मेलन का मुख्य संदेश रहा कि रेलवे में सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए तकनीक, समय पर सूचना साझा करने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को एक साथ आगे बढ़ाना होगा।














