मेरठ। स्थानीय जिला अदालत ने देश को झकझोर देने वाले चर्चित ‘नीला ड्रम हत्याकांड‘ में आज अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। न्यायालय ने मामले को बेहद जघन्य और दुर्लभ से दुर्लभतम मानते हुए मुख्य आरोपी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। इस क्रूर हत्याकांड में एक पत्नी ने अपने ही पति सौरभ राजपूत की हत्या कर उसके शव के टुकड़े किए और राज छुपाने के लिए उन्हें सीमेंट के ड्रम में बंद कर दिया था। 

क्या था पूरा मामला?

यह सनसनीखेज वारदात 3 मार्च 2025 को मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर में अंजाम दी गई थी。 मर्चेंट नेवी में कार्यरत सौरभ राजपूत की शादी साल 2016 में मुस्कान रस्तोगी से हुई थी। साल 2023 में सौरभ को अपनी पत्नी मुस्कान और साहिल शुक्ला के बीच चल रहे प्रेम प्रसंग और चैट्स के बारे में पता चला, जिसके बाद घर में विवाद शुरू हो गया। 
लंदन से अपना जन्मदिन मनाने भारत लौटे सौरभ को भनक भी नहीं थी कि उसकी पत्नी ही उसकी जान की दुश्मन बन चुकी है。 3 मार्च की रात को मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर सौरभ पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए और उसे मौत के घाट उतार दिया। 

पुलिस की मजबूत पैरवी और 576 दिनों का लंबा इंतजार

मेरठ पुलिस ने घटना के बाद तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने महज 54 दिनों के भीतर अदालत में करीब 1000 पन्नों की बेहद मजबूत चार्जशीट दाखिल की, जिसमें तंत्र-मंत्र के दावों को खारिज करते हुए प्रेम प्रसंग को ही हत्या की मुख्य वजह बताया गया। लगभग डेढ़ साल (576 दिन) तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 34 से अधिक गवाह और पुख्ता वैज्ञानिक सबूत पेश किए। 

अदालत का फैसला सुनते ही फूट-फूट कर रो पड़े दोषी

आज जैसे ही मेरठ जिला न्यायालय के न्यायाधीश ने दोनों को हत्या का दोषी करार देते हुए फांसी (सजा-ए-मौत) का फरमान सुनाया, कोर्ट रूम में सन्नाटा पसर गया। खुद को कानून से ऊपर समझने वाली मुख्य आरोपी मुस्कान और उसका प्रेमी साहिल जज के मुंह से मृत्युदंड की बात सुनते ही वीडियो कांफ्रेंस के दौरान ही फूट-फूट कर रो पड़े।
सुरक्षा कारणों और संवेदनशीलता के चलते मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला की पेशी जिला कारागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए कराई गई थी। जैसे ही न्यायाधीश ने मामले को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rare of Rarest) श्रेणी का मानते हुए दोनों को फांसी (सजा-ए-मौत) का फरमान सुनाया, जेल की स्क्रीन पर ही दोनों दोषी अवाक रह गए और फूट-फूटकर रोने लगे।

न्यायाधीश की टिप्पणी: ‘दंड देना भी धर्म का काम’

फैसला सुनाते समय मेरठ जिला अदालत के न्यायाधीश की टिप्पणी ने सभी का ध्यान खींचा। न्यायाधीश ने महाभारत का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि अपराधी को उसके अपराध के अनुरूप सजा देना भी धर्म का ही काम है। उन्होंने कहा कि “दंड भी धर्म है”, यानी समाज में न्याय व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे जघन्य अपराधियों को कड़ा दंड देना अनिवार्य है। कोर्ट ने माना कि शव के टुकड़े-टुकड़े कर उसे सीमेंट के ड्रम में छिपाने जैसा क्रूर कृत्य समाज में व्यापक भय पैदा करता है। फांसी के साथ ही कोर्ट ने दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।

क्या था पूरा मामला और क्रूरता की कहानी?

यह खौफनाक वारदात 3 मार्च 2025 को मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में घटित हुई थी। मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत की शादी मुस्कान से हुई थी, लेकिन मुस्कान का साहिल शुक्ला के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। जब सौरभ को इस बात की भनक लगी, तो मुस्कान और साहिल ने मिलकर खौफनाक साजिश रची। 3 मार्च की रात सौरभ को नशीला पदार्थ देने के बाद उसकी चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। इसके बाद साक्ष्य छिपाने के लिए सौरभ के शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले प्लास्टिक ड्रम में डालकर लिक्विड सीमेंट व कंक्रीट से सील कर दिया गया।इस खौफनाक साजिश को अंजाम देने के अगले ही दिन दोनों आरोपी बेखौफ होकर शिमला और मनाली घूमने चले गए थे। वापस लौटने पर जब पुलिस ने मामले का पर्दाफाश किया, तो पूरे देश की रूह कांप गई।

13 महीने का ट्रायल, 22 गवाहों ने दिलाई सजा

मेरठ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को दबोचा था। अदालत में करीब 13 महीने तक चले इस ट्रायल के दौरान कुल 126 सुनवाइयां हुईं। अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ 22 महत्वपूर्ण गवाहों को अदालत के सामने पेश किया, जिनमें ड्रम, सीमेंट और कटर मशीन बेचने वाले दुकानदार भी शामिल थे। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत ने 30 सितंबर को ही दोनों को हत्या का दोषी मान लिया था और आज उनकी सजा मुकर्रर कर दी।

पीड़ित परिवार ने कहा- “आज मिली आत्मा को शांति”

सुनवाई के दौरान मृत सौरभ राजपूत की मां रेनू देवी और भाई कोर्ट परिसर में ही मौजूद थे। फांसी का फैसला आने के बाद सौरभ के भाई राहुल ने भावुक होकर कहा, “हम शुरू से ही न्याय की उम्मीद लगाए बैठे थे। जो क्रूरता उन्होंने हमारे भाई के साथ की, आज उन्हें उसकी सही सजा मिली है”। माँ रेनू देवी ने भी रोते हुए कहा कि आज उनके बेटे की आत्मा को सच्ची शांति मिली है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here