स्वास्थ्य सचिव का हाई कोर्ट में हलफनामा, 4 फरवरी को अगली सुनवाई

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के एकमात्र शासकीय मानसिक चिकित्सालय सेंदरी में इलाज और स्टाफ की गंभीर कमी को लेकर दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य सचिव ने स्थिति स्पष्ट करते हुए हलफनामा पेश किया।


दो मनोचिकित्सक संविदा पर तैनात

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि निर्धारित मानकों के अनुसार योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने के कारण दो मनोचिकित्सकों की नियुक्ति फिलहाल संविदा आधार पर की गई है। यह व्यवस्था अस्पताल की तत्काल जरूरतों को देखते हुए की गई है।


भर्ती प्रक्रिया अभी अधूरी

हलफनामे में यह भी स्पष्ट किया गया कि क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर (मनोरोग) के पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इन पदों के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग से परिणाम आने का इंतजार किया जा रहा है।

वहीं, वार्ड बॉय और वार्ड आया के पदों के लिए व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा लिखित परीक्षा, उत्तर कुंजी पर आपत्तियों का निराकरण और अंतिम परिणाम जारी करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।


अदालत की टिप्पणी: प्रगति हुई, लेकिन काम बाकी

मामले की सुनवाई रमेश सिन्हा और रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ में हुई। अदालत ने कहा कि कई पदों पर भर्ती की दिशा में प्रगति हुई है और अस्थायी व्यवस्थाएं की गई हैं, लेकिन मनोचिकित्सकों की स्थायी नियुक्ति और मनोवैज्ञानिक व काउंसलर पदों की चयन प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।


नया विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश

सुनवाई के बाद अदालत ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि वे नया और विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। इसमें मनोचिकित्सक पदों पर नई भर्ती की समय-सीमा, आवेदन और साक्षात्कार की संभावित तिथियां, तथा तब तक अपनाई गई वैकल्पिक व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी शामिल की जाए।
अदालत ने अगली सुनवाई 4 फरवरी को तय की है।


जनहित याचिका की पृष्ठभूमि

सेंदरी मानसिक अस्पताल में मरीजों के उपचार की खराब स्थिति और आवश्यक मेडिकल स्टाफ की भारी कमी को लेकर विशाल कोहली ने अधिवक्ता हिमांशु पांडेय के माध्यम से जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है।

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