हॉर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु कार्यक्रम और 60 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव पर बढ़ी हलचल; तेहरान और वॉशिंगटन के दावों में अब भी बड़ा अंतर

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में पिछले तीन महीने से जारी भीषण संघर्ष अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां युद्ध और शांति दोनों की संभावनाएं साथ-साथ चल रही हैं। ईरान युद्ध के 92वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक संभावित समझौते पर अंतिम निर्णय लेने की तैयारी में हैं, जबकि तेहरान अब भी यह कह रहा है कि किसी अंतिम सहमति की घोषणा करना जल्दबाजी होगी।

अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच 60 दिन के एक अस्थायी समझौते (MoU) का मसौदा तैयार होने की खबरें सामने आई हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मौजूदा युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा सकता है और इसी अवधि में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और जलडमरूमध्य के भविष्य पर औपचारिक वार्ताएं होंगी। हालांकि अंतिम मंजूरी अभी ट्रंप के हाथ में है।

जानें, आखिर यह युद्ध शुरू कैसे हुआ?

वर्तमान संघर्ष की जड़ें अमेरिका-ईरान परमाणु विवाद और क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष में हैं। 2025 से दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को एक समयसीमा देकर परमाणु गतिविधियों पर कठोर प्रतिबंध स्वीकार करने को कहा था। वार्ता विफल रहने के बाद फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के सैन्य और परमाणु प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए तथा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया।

युद्ध के दौरान तेल बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं प्रभावित हो चुकी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है, इसलिए इसके बंद होने का असर एशिया, यूरोप और अमेरिका तक महसूस किया जा रहा है।

ट्रंप की नई शर्तें क्या हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि किसी भी समझौते की बुनियादी शर्त यह होगी कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करे। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को नष्ट करे या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में देश से बाहर भेजे। साथ ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और वहां जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग भी की जा रही है।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ कई दौर की बैठकों के बाद संकेत दिया है कि वे जल्द ही अंतिम फैसला करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि यदि वार्ता विफल होती है तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है।

ईरान क्यों सतर्क है?

तेहरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार नहीं चाहता, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम उसका अधिकार है। ईरानी अधिकारियों ने कई अमेरिकी दावों का खंडन करते हुए कहा है कि अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और सार्वजनिक बयानबाजी वास्तविक वार्ता से आगे निकल गई है

ईरान इस बात पर भी जोर दे रहा है कि प्रतिबंधों में राहत, सुरक्षा गारंटी और क्षेत्रीय हमलों की समाप्ति किसी भी समझौते का हिस्सा होनी चाहिए।

दुनिया की नजरें हॉर्मुज पर

वर्तमान वार्ताओं का सबसे महत्वपूर्ण पहलू हॉर्मुज जलडमरूमध्य है। युद्ध शुरू होने के बाद यह समुद्री मार्ग वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया था। अब प्रस्तावित समझौते में इसे दोबारा पूरी तरह खोलने और समुद्री यातायात सामान्य करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि समझौता सफल होता है तो तेल बाजार को राहत मिल सकती है और पश्चिम एशिया में व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का खतरा भी कम होगा। लेकिन यदि वार्ता टूटती है, तो 92 दिन से जारी यह संघर्ष फिर नए और अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश कर सकता है। ड

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