डबल मर्डर का दोषी था मृतक, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल; कलेक्टर-एसएसपी ने किया निरीक्षण

बिलासपुर। बिलासपुर सेंट्रल जेल में बुधवार को एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जब डबल मर्डर मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा एक बंदी जलते हुए गैसीफायर प्लांट की भट्ठी में कूद गया। गंभीर रूप से झुलसने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद जेल प्रशासन, पुलिस और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया।

मृतक  राहुल उर्फ विकेश कंवर (46), निवासी बम्हनीडीह (चांपा) वर्ष 2016 से दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था और पिछले 10 वर्षों से बिलासपुर सेंट्रल जेल में बंद था।

जानकारी के अनुसार, शाम करीब 4:30 बजे जेल परिसर स्थित रसोई के गैसीफायर प्लांट में भोजन तैयार किया जा रहा था।  अचानक राहुल वहां पहुंचा और किसी के कुछ समझने से पहले सीधे जलती भट्ठी में छलांग लगा दी। जेल कर्मचारी उसे बचाने दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, पुलिस और फॉरेंसिक (एफएसएल) की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जेल अधिकारियों से जानकारी ली। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

जेल अधीक्षक सोमेश मंडावी ने बताया कि राहुल उर्फ विकेश वर्ष 2016 से दोषसिद्ध बंदी था। बुधवार शाम भोजन बनाते समय उसने गैसीफायर में छलांग लगा दी, जिससे अत्यधिक गर्मी के कारण उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

24 महीनों में 18वीं मौत, एक महीने में पांचवीं घटना

बिलासपुर सेंट्रल जेल में लगातार हो रही मौतों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। पिछले 24 महीनों में 18 बंदियों की मौत हो चुकी है। इनमें से केवल पिछले एक महीने में ही यह पांचवीं मौत है।

23 जून को पॉक्सो प्रकरण के आरोपी नीलू जगत की जेल के भीतर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद रायगढ़ के उम्रकैद के बंदी रामभरोसे माझी की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। जून में ही राजू गोंड और धर्मेंद्र सिंह की भी जेल में मृत्यु हुई थी। अब राहुल उर्फ विकेश की आत्महत्या ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि एक दोषसिद्ध बंदी हाई-सिक्योरिटी जेल के संवेदनशील हिस्से तक पहुंचकर गैसीफायर की जलती भट्ठी में कूद गया। इससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

पुलिस यह जांच कर रही है कि घटना के समय किन कर्मचारियों की ड्यूटी थी, गैसीफायर क्षेत्र तक बंदी कैसे पहुंचा और कहीं सुरक्षा में चूक तो नहीं हुई। साथ ही, आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है।

बिलासपुर सेंट्रल जेल पहले भी बंदियों के बीच हिंसक झड़प, संदिग्ध मौतों, मोबाइल फोन और नशीले पदार्थों की बरामदगी तथा सुरक्षा में लापरवाही जैसे मामलों को लेकर चर्चा में रही है। ताजा घटना ने एक बार फिर जेल प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

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