प्रदेश में बारिश कमजोर पड़ने से राहत की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन नदियों का जलस्तर सामान्य होने और जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी उतरने तक प्रभावित इलाकों में सतर्कता बरतने की जरूरत बनी हुई है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में हुई लगातार बारिश के बाद बाढ़ और जलभराव से प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है। बारिश कमजोर पड़ने के बावजूद बस्तर, दुर्ग, रायपुर, धमतरी, बिलासपुर और आसपास के जिलों में नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। पिछले दो दिनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में करीब 5,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बस्तर में बाढ़ के बीच फंसे 16 लोगों को भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया। वहीं, बिलासपुर और धमतरी में नदी के तेज बहाव में बहने से लोगों की मौत और लापता होने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
बाढ़ का सबसे अधिक असर बस्तर संभाग में देखने को मिला है। इंद्रावती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया था। दूसरी ओर दुर्ग संभाग में शिवनाथ नदी और उसकी सहायक नदियों के उफान से गांवों और निचली बस्तियों में पानी भर गया। रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र में भी नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा।
बस्तर में सबसे ज्यादा असर, 16 लोगों को हेलीकॉप्टर से निकाला
बस्तर संभाग में लगातार बारिश और ओडिशा के जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। बस्तर जिले में नदी किनारे बसे निचले इलाकों में पानी भर गया और कई गांवों का संपर्क दूसरे क्षेत्रों से कट गया।
भारतीय वायुसेना की मदद से डोंगाघाट क्षेत्र में बाढ़ के बीच फंसे 16 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा प्रशासन, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और अन्य राहत दलों ने नावों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
बस्तर जिले में राहत एवं बचाव कार्य के दौरान एक हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया। जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां प्रभावित लोगों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
इंद्रावती नदी का जलस्तर 26 सितंबर की रात आठ बजे 12.56 मीटर दर्ज किया गया था, जो खतरे के निशान से 4.26 मीटर ऊपर था। इसके बाद जलस्तर में धीरे-धीरे गिरावट दर्ज की गई, लेकिन नदी किनारे बसे इलाकों में खतरा बना रहा।
कई गांवों का संपर्क टूटा, एनएच-30 पर फंसे ट्रक चालक बचाए गए
बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में बाढ़ के कारण सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। बीजापुर और सुकमा सहित कई इलाकों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवागमन बाधित होने की सूचना है। रायपुर-जगदलपुर मार्ग पर भी बारिश के कारण कई बसों के फंसने की खबर सामने आई।
राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर सोनारपाल के पास बाढ़ के पानी में फंसे करीब आधा दर्जन ट्रक चालकों और उनके सहायकों को राहत दलों ने सुरक्षित निकाला। पानी बढ़ने के कारण ट्रक सवार लोग अपने वाहनों की छतों पर चढ़कर मदद का इंतजार कर रहे थे।
नारायणपुर जिले के ओरछा ब्लॉक के कलमानार गांव में नदी किनारे रहने वाले नौ परिवारों को सुरक्षित स्थानों और रिश्तेदारों के घरों में पहुंचाया गया। तरागांव में बाढ़ के पानी में फंसे 55 वर्षीय गोपी राम पटेल को भी बचाया गया।
महानदी में बहकर आईं शराब की बोतलें, बटोरने जुटे लोग
धमतरी जिले में महानदी की बाढ़ के बीच एक अलग ही नजारा देखने को मिला। कुरुद क्षेत्र के नारी गांव में स्थित देशी शराब दुकान पानी में डूब गई। दुकान में रखी शराब की बोतलें पानी के तेज बहाव के साथ बहने लगीं। इसके बाद कुछ लोग बोतलों को पकड़ने के लिए नदी के किनारे और पुल पर जुट गए। वायरल वीडियो में लोग बांस, रस्सी और जाल के सहारे बहती बोतलों को निकालने की कोशिश करते नजर आए। उफनती नदी के तेज बहाव के बीच इस तरह की कोशिशों से हादसे का खतरा भी बना रहा।
शिवनाथ नदी उफान पर, सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला
दुर्ग संभाग में लगातार बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण शिवनाथ नदी का जलस्तर बढ़ गया। दुर्ग और भिलाई के आसपास के निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
दुर्ग जिले में 24 और 25 सितंबर को हुई बारिश के बाद करीब 200 मकानों में पानी घुस गया था। जिले के 13 ग्रामीण क्षेत्रों और दुर्ग-भिलाई के कुछ हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बने। प्रशासन के अनुसार, 764 लोगों को सुरक्षित निकालकर 16 अस्थायी राहत शिविरों में पहुंचाया गया, जहां उनके लिए भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई।
कुम्हारी थाना क्षेत्र के परसदा गांव में एसडीआरएफ और नगर सेना की टीमों ने रातभर अभियान चलाकर 160 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। अमलेश्वर क्षेत्र में भी बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को निकाला गया।
राजनांदगांव जिले के बैराजों से शिवनाथ नदी में पानी छोड़े जाने के कारण नदी का जलस्तर बढ़ा था। जल संसाधन विभाग के अनुसार, 26 सितंबर की सुबह तक चार बैराजों से करीब 20,090 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। पानी की आवक में कमी आने के बाद भी नदी के आसपास के इलाकों में निगरानी जारी रही।
अभनपुर में करीब 2 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र में नदी किनारे बसे कई गांवों और बस्तियों में बाढ़ का पानी घुस गया। नवापारा, सोमवारी बाजार, नेहरू घाट, परागांव और कुटीपारा सहित कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी।
प्रशासन ने करीब 2,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत केंद्रों में पहुंचाया। प्रभावित लोगों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान प्रभावित लोगों को पांच-पांच हजार रुपये की सहायता राशि के चेक भी वितरित किए गए।
आश्रम में फंसे नौ लोगों को निकाला
धमतरी जिले के कुरुद क्षेत्र में बाढ़ के पानी से घिरे लोमश ऋषि आश्रम में नौ लोग फंस गए थे। पुलिस और प्रशासन की टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। जिले के नारी गांव में भी बाढ़ के पानी में घिरी शराब दुकान के पास फंसे लोगों को निकालने के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात की गई।
नदी में बहने से मौत और लापता होने की घटनाएं
बाढ़ और तेज बहाव के बीच धमतरी और बिलासपुर में हादसों की खबरें भी सामने आई हैं।
धमतरी जिले में शनिवार को अलग-अलग घटनाओं में नदी के तेज बहाव में बहने से दो लोगों के लापता होने की सूचना मिली थी। कुरुद क्षेत्र के लम्हाश ऋषि आश्रम में फंसे नौ लोगों को पुलिस और प्रशासन की टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित निकाला। नारी गांव में जलभराव के कारण फंसे लोगों को निकालने के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात की गई।
बिलासपुर में अरपा नदी के तेज बहाव में दयालबंद क्षेत्र के मधुबन घाट पर नहाते समय 12 और 16 वर्ष के दो किशोर बह गए। इनमें से एक का शव शनिवार देर रात बरामद कर लिया गया था, जबकि दूसरे की तलाश जारी थी।
जांजगीर-चांपा के शिवरीनारायण में महानदी का जलस्तर बढ़ने से शबरी पुल पूरी तरह डूब गया। निचली बस्तियों में पानी घुसा, प्रभावित लोगों को राहत शिविर भेजा गया।
बस्तर संभाग में भी बाढ़ के पानी में डूबने से एक व्यक्ति की मौत की सूचना सामने आई है।
बारिश कमजोर, लेकिन नदी-नालों के किनारे अब भी खतरा
प्रदेश में बारिश की तीव्रता कम होने के बावजूद बाढ़ का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। ऊपरी क्षेत्रों से लगातार पानी आने और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण कई नदियों का जलस्तर ऊंचा बना हुआ है।
बस्तर में इंद्रावती नदी, दुर्ग संभाग में शिवनाथ नदी और रायपुर क्षेत्र में खारुन नदी के आसपास के निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न होने से आवागमन बाधित है। नदी-नालों के तेज बहाव वाले हिस्सों में लोगों को जाने से रोका जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है।














