सागौन की ताजा कटी बल्ली की जानकारी लेने पहुंची थी वन विभाग की टीम, शासकीय कार्य में बाधा और जान से मारने की धमकी का आरोप

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। पेंड्रा थाना क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान एक महिला वन रक्षक के साथ कथित मारपीट, अभद्रता और शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना को लेकर वन विभाग के कर्मचारियों में भी नाराजगी देखी जा रही है।

जानकारी के अनुसार लाटा परिसर में पदस्थ महिला वन रक्षक गिरिजा कंवर सुरक्षा श्रमिकों के साथ नियमित जंगल भ्रमण पर निकली थीं। भ्रमण के दौरान कक्ष क्रमांक 2350 के समीप स्थित एक मकान में उन्हें सागौन की ताजा कटी हुई बल्लियां रखी दिखाई दीं। वन संपदा से जुड़े मामले की जानकारी लेने के लिए वह अपने साथ मौजूद श्रमिकों के साथ संबंधित घर पहुंचीं।

पूछताछ का विरोध, फिर बढ़ा विवाद

बताया गया है कि घर में मौजूद इतवारू भैना, उसकी पत्नी सुमित्रा और सास दयावती ने वन विभाग की टीम को देखकर आपत्ति जताई। आरोप है कि तीनों ने महिला वन रक्षक के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। जब उन्होंने विरोध करते हुए शासकीय कार्य में सहयोग करने की बात कही, तो विवाद बढ़ गया।

शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने महिला वन रक्षक के साथ मारपीट की और उन्हें जमीन पर गिरा दिया। इस दौरान उनकी शासकीय वर्दी भी फाड़ दी गई। आरोप है कि शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। घटना के समय मौजूद सुरक्षा श्रमिकों ने बीच-बचाव कर किसी तरह महिला वन रक्षक को आरोपियों से छुड़ाया। इसके बाद पीड़िता सीधे पेंड्रा थाना पहुंचीं और पूरे घटनाक्रम की शिकायत दर्ज कराई।

कई धाराओं में अपराध दर्ज

एसडीओपी श्याम सिदार के अनुसार पीड़िता की शिकायत के आधार पर अपराध क्रमांक 0178/26 दर्ज किया गया है। आरोपी सुमित्रा, दयावती और इतवारू भैना के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 121(1), 132, 296, 3(5) और 351(3) के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है।

जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

ड्यूटी के दौरान महिला वनकर्मी के साथ हुई इस घटना को वन विभाग के कर्मचारी गंभीरता से देख रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि जंगल और वन संपदा की सुरक्षा में लगे कर्मचारियों के साथ इस तरह की घटनाएं चिंताजनक हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

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