कोर्ट ने कहा- परिवार का एक सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है तो दूसरे को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं
बिलासपुर। अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने के लिए परिवार के किसी सदस्य की सरकारी नौकरी की जानकारी छिपाना कर्मचारी को भारी पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक मामले में स्पष्ट किया है कि यदि मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं है। तथ्यों को छिपाकर नियुक्ति हासिल की गई हो तो ऐसी नियुक्ति समाप्त की जा सकती है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने जांजगीर-चांपा निवासी जीतू पोर्ते की रिट अपील खारिज करते हुए राज्य सरकार द्वारा उसकी सेवा समाप्त करने के आदेश को बरकरार रखा।
मां की नौकरी छिपाकर हासिल की थी नियुक्ति
मामले के अनुसार जीतू पोर्ते के पिता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य थे। 1 मई 2021 को उनकी मृत्यु के बाद जीतू ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया और उसी महीने उसे सरकारी नौकरी मिल गई।
बाद में शिक्षा विभाग को शिकायत मिली कि मृत कर्मचारी की पत्नी यानी जीतू की मां पहले से ही सरकारी सेवा में हैं। जांच में सामने आया कि अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए जीतू ने शपथपत्र में मां की सरकारी नौकरी की जानकारी छिपाई थी। इसे गलत घोषणा मानते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने दिसंबर 2021 में उसकी सेवा समाप्त कर दी।
अलग रहने और आर्थिक मदद नहीं मिलने का दिया तर्क
जीतू ने सेवा समाप्ति के आदेश को हाई कोर्ट की एकलपीठ में चुनौती दी थी। उसका कहना था कि मां उसके पिता की मृत्यु से पहले से अलग रह रही थीं और पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने परिवार को कोई आर्थिक सहायता नहीं दी। उसने यह भी दावा किया कि सेवा समाप्त करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया और परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति की जांच भी नहीं की गई।
एकलपीठ ने राज्य सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके बाद जीतू ने युगलपीठ में अपील दाखिल की।
नीति की शर्तों को कोर्ट नहीं बदल सकता
युगलपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति नीति के क्लॉज 6-ए का हवाला देते हुए कहा कि परिवार का एक सदस्य यदि पहले से सरकारी सेवा में है तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह नीति की निर्धारित शर्तों को अपनी ओर से बदल नहीं सकता।
युगलपीठ ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता ने नियुक्ति के लिए जरूरी तथ्य छिपाकर गलत घोषणा की थी। इसलिए उसकी नियुक्ति की पात्रता समाप्त हो गई थी। कोर्ट ने यह जांच कराने से भी इनकार किया कि सरकारी नौकरी में मौजूद परिवार का सदस्य अन्य आश्रितों को आर्थिक सहायता दे रहा था या नहीं।
इस आधार पर हाई कोर्ट ने एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए रिट अपील खारिज कर दी।














