दस्तावेजों की कमी बनी वजह, शिक्षा विभाग हरकत में; डीईओ ने कहा- किसी बच्चे की पढ़ाई नहीं रुकेगी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। राज्य सरकार जहां हर बच्चे को स्कूल तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं सरकारी व्यवस्था की जटिल प्रक्रियाओं ने एक छात्र को इतना परेशान कर दिया कि उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। पेंड्रा विकासखंड की खोड़री पंचायत के एक छात्र ने कक्षा नौवीं में प्रवेश नहीं मिलने से निराश होकर कीटनाशक का सेवन कर लिया। समय रहते परिजनों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जिससे उसकी जान बच गई।
घटना ने शिक्षा व्यवस्था में दस्तावेजी प्रक्रियाओं की जटिलता और विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दस्तावेजों के अभाव में अटका प्रवेश
जानकारी के अनुसार छात्र ने आठवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कोड़गार स्थित हाईस्कूल में नौवीं कक्षा में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। बताया जा रहा है कि कुछ आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण उसका प्रवेश पूरा नहीं हो सका।
छात्र लगातार दस्तावेज जुटाने और प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराने का प्रयास कर रहा था, लेकिन सफलता नहीं मिलने से वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा। परिजनों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से वह अपनी पढ़ाई को लेकर काफी चिंतित था।
घर में रखा कृषि रसायन पी लिया
बताया गया कि तनाव के बीच छात्र ने घर में रखा कृषि कार्य में उपयोग होने वाला रासायनिक पदार्थ पी लिया। कुछ ही देर में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों को जानकारी मिलने पर उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने त्वरित उपचार शुरू किया और उसकी जान बचा ली।
अस्पताल पहुंचे डीईओ, परिवार को दिया भरोसा
घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने उपचाराधीन छात्र और उसके परिजनों से मुलाकात कर हालचाल जाना। डीईओ ने परिवार को आश्वस्त किया कि दस्तावेजी कारणों से किसी भी बच्चे की पढ़ाई बाधित नहीं होने दी जाएगी।
उन्होंने छात्र का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि फिलहाल उसका स्वस्थ होना सबसे महत्वपूर्ण है। स्वस्थ होने के बाद उसकी शिक्षा से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
डीईओ रजनीश तिवारी ने संबंधित सीईओ और स्कूल प्राचार्य को निर्देश दिए हैं कि छात्र के स्वस्थ होते ही उसका प्रवेश सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि हर बच्चा स्कूल पहुंचे और किसी भी अभिभावक को प्रवेश के लिए अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी विद्यालय से प्रवेश को लेकर अभिभावकों को परेशान करने की शिकायत मिलती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
छात्र की हालत स्थिर
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. प्रशांत रात्रे ने बताया कि छात्र ने विषाक्त पदार्थ का सेवन किया था। समय पर अस्पताल लाने और उपचार मिलने से उसकी स्थिति अब नियंत्रण में है। फिलहाल उसे निगरानी में रखा गया है और स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
घटना के बाद प्रशासन भी पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि प्रवेश प्रक्रिया में कौन-सा दस्तावेज बाधा बना और वह समय पर उपलब्ध क्यों नहीं हो पाया।














