उद्गम स्थलों को पर्यटन से जोड़ने, जल संरक्षण बढ़ाने और नदियों में कचरा फेंकने पर सख्ती; छात्रों को नदियों के इतिहास से जोड़ने की पहल

रायपुर, 15 जून। छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियों को पुनर्जीवित करने और उनके संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित राज्य स्तरीय समिति की बैठक सोमवार को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न जिलों से होकर बहने वाली नदियों के संरक्षण, पुनर्जीवन और जलग्रहण क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि नदी संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य और भविष्य की जल सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी कलेक्टरों को हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नदी पुनर्जीवन कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

बैठक में जलग्रहण क्षेत्रों में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा आवश्यक जल संरचनाओं के निर्माण के लिए कार्ययोजनाएं तैयार करने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि इन कार्यों में स्थानीय सरपंचों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि योजनाएं स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बन सकें।

उन्होंने कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में उद्गम लेने वाली नदियों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड तैयार करने के भी निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे नई पीढ़ी को अपनी नदियों की जानकारी मिल सकेगी। इसके लिए स्कूली विद्यार्थियों के नदी उद्गम स्थलों के शैक्षणिक भ्रमण, ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताएं तथा स्थानीय स्तर पर मेले और उत्सव आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया।

बैठक में रायगढ़, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम), सरगुजा, कोरिया, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, गरियाबंद और धमतरी जिलों के कलेक्टरों ने अपने क्षेत्रों की नदियों की वर्तमान स्थिति, चल रहे कार्यों और आगामी योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की। नदी संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए गठित जिला स्तरीय समितियों की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि वीबीजी, कैंपा, मनरेगा और डीएमएफ जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से नदी जलग्रहण क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और भूजल संवर्धन संबंधी कार्यों को गति दी जाए। साथ ही प्रमुख नदी स्थलों को पर्यटन से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार कर उसे अमल में लाने के निर्देश भी दिए गए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि नदियों में किसी भी प्रकार का कचरा या अपशिष्ट नहीं डाला जाना चाहिए। इसके लिए लगातार निगरानी और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक में प्रोफेसर डॉ. एम.के. वर्मा ने नदी जल संरक्षण पर तकनीकी प्रस्तुति दी, जबकि एनआईटी के जल वैज्ञानिक एवं प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नदी संरक्षण और पर्यावरणीय पहलुओं पर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। बैठक में जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, वन, वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खनिज संसाधन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल और केंद्रीय भूजल बोर्ड के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

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