औद्योगिक सेफ्टी शूज़ जैसी शर्तें जोड़कर चुनिंदा बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए लगभग 12.40 लाख जोड़ी कैनवास जूतों की खरीद से जुड़े सरकारी टेंडर को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। अदालत ने माना कि टेंडर में ऐसी शर्तें जोड़ी गई थीं, जिनका संबंध सामान्य कैनवास जूतों से नहीं बल्कि औद्योगिक उपयोग वाले सेफ्टी शूज़ से था। इससे केवल कुछ बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने की संभावना बन रही थी।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह फैसला दिल्ली की एम/एस चरणपादुका इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनाया।
टेंडर की शर्तों को दी गई थी चुनौती
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज व्यापार एवं विकास सहकारी संघ मर्यादित ने 4 जून 2026 को GeM पोर्टल के माध्यम से यह निविदा जारी की थी। एमएसएमई अधिनियम के तहत पंजीकृत याचिकाकर्ता कंपनी ने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तें तर्कहीन, भेदभावपूर्ण और छोटे उद्यमों को बाहर करने वाली हैं।
कैनवास जूतों के लिए सेफ्टी बूट के मानक
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि खरीद साधारण कैनवास जूतों की होनी थी, लेकिन निविदा में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के वे मानक अनिवार्य कर दिए गए जो भारी उद्योगों और फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाले सेफ्टी फुटवियर पर लागू होते हैं।
याचिका में यह भी बताया गया कि वर्ष 2024 की निविदा में उत्पाद श्रेणी ‘वॉकिंग शूज़ (Q3)’ थी, जबकि इस बार उसे बदलकर ‘सेफ्टी फुटवियर (Q2)’ कर दिया गया। इससे प्रतियोगिता सीमित हो गई और छोटे एवं मध्यम उद्योगों के लिए भाग लेना मुश्किल हो गया।
अदालत को नहीं मिला संतोषजनक कारण
वनोपज संघ की ओर से दलील दी गई कि बड़ी संख्या में निर्धारित समय पर गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सक्षम कंपनियों का चयन आवश्यक था।
लेकिन हाईकोर्ट ने पूछा कि पिछली निविदा की तुलना में इस बार मानकों को अचानक इतना कड़ा करने का आधार क्या था। इस पर संघ कोई तार्किक और संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर सका।
नई निविदा जारी करने के निर्देश
खंडपीठ ने कहा कि टेंडर में शामिल कई शर्तें जानबूझकर ऐसी रखी गई थीं, जिनसे कुछ चुनिंदा बड़ी कंपनियों को लाभ मिल सकता था। इसे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सिद्धांत के विपरीत मानते हुए अदालत ने 4 जून 2026 की मूल निविदा और उससे जुड़ी सभी अतिरिक्त शर्तों को निरस्त कर दिया।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज व्यापार एवं विकास सहकारी संघ को निर्देश दिया है कि पूरी पारदर्शिता के साथ नई निविदा जारी की जाए, ताकि सभी पात्र कंपनियों को समान अवसर मिल सके।














