मामला मध्यस्थता केंद्र भेजा, पति को एक लाख रुपये जमा करने की शर्त

बिलासपुर। वैवाहिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुलह की संभावना को देखते हुए अहम आदेश दिया है। अदालत ने ससुराल पक्ष के बुजुर्ग माता-पिता, पति और ननद के खिलाफ दर्ज एफआईआर तथा रायपुर की अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही मामले को हाईकोर्ट के मध्यस्थता केंद्र (मेडिएशन सेंटर) भेज दिया है, ताकि टूटते वैवाहिक रिश्ते को बचाने का प्रयास किया जा सके।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने पारित किया।

शादी के कुछ दिन बाद शुरू हुआ विवाद

याचिका के अनुसार, बिलासपुर निवासी 39 वर्षीय सौरभ कुमार शुक्ला और रायपुर निवासी रुचि दीक्षित का विवाह 24 नवंबर 2024 को हुआ था। पति का कहना है कि विवाह के कुछ ही दिनों बाद पत्नी अपने मायके चली गई और फिर दोनों के बीच विवाद बढ़ता चला गया।

बाद में पत्नी ने महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने पति के अलावा सरकंडा निवासी उसके बुजुर्ग माता-पिता और मुंगेली में रहने वाली विवाहित बहन के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर ली।

चार्जशीट पर भी उठे सवाल

ससुराल पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रतीक शर्मा ने अदालत में दलील दी कि पुलिस ने तथ्यों की गंभीर जांच किए बिना यांत्रिक ढंग से चार्जशीट पेश कर दी। उन्होंने कहा कि विवाहित ननद को भी बिना किसी ठोस आधार के आरोपी बना दिया गया।

मध्यस्थता के लिए 9 जुलाई की तारीख तय

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवाद में यदि समझौते की संभावना हो तो उसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी उद्देश्य से अदालत ने दोनों पक्षों को 9 जुलाई को हाईकोर्ट के मेडिएशन सेंटर में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

पति के लिए रखी सख्त शर्त

खंडपीठ ने पति को एक लाख रुपये जमा करने का निर्देश भी दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में यह राशि जमा नहीं की गई, तो एफआईआर और ट्रायल पर दी गई अंतरिम रोक स्वतः समाप्त हो जाएगी।

फिलहाल, हाईकोर्ट ने मामले में अंतिम निर्णय से पहले दोनों पक्षों को बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझाने का अवसर देने का फैसला किया है।

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