कोर्ट ने कहा-नियम मूल कानून की सीमा से आगे नहीं जा सकते
बिलासपुर। तेंदूपत्ता कारोबारियों से 2 प्रतिशत Access and Benefit Sharing (ABS) शुल्क की वसूली को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने कहा कि लाभकारी कानून की व्याख्या उसके उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाली होनी चाहिए, लेकिन ऐसी व्याख्या कानून के स्पष्ट प्रावधानों की सीमा पार नहीं कर सकती।
मामला छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड की ओर से तेंदूपत्ता कारोबारियों से ABS शुल्क की वसूली से जुड़ा है। बोर्ड ने 24 जनवरी 2023 को जैव विविधता नियम, 2015 के नियम 17(4) के तहत कुछ वन अधिकारियों को अधिकृत अधिकारी घोषित किया था।
इन अधिकारियों को तेंदूपत्ता कारोबारियों को आवंटित वन लॉट की खरीद कीमत के आधार पर 2 प्रतिशत ABS शुल्क वसूलने के निर्देश दिए गए थे। इसके अगले दिन 25 जनवरी को जारी पत्र में खरीदारों के अनुबंध में नियम 15-B को शामिल करने और ABS राशि बोर्ड के पास जमा करने की प्रक्रिया बताई गई थी।
इसके आधार पर संबंधित वन मंडल अधिकारियों ने कारोबारियों से राशि की कटौती और वसूली की कार्रवाई शुरू की। कारोबारियों ने 24 और 25 जनवरी के आदेशों सहित पूरी कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
कोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ कानून मूल अधिनियम के अधीन होता है। वह अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नए अधिकार या दायित्व पैदा नहीं कर सकता। हालांकि इस मामले में कारोबारियों की ओर से उठाई गई चुनौती स्वीकार करने का आधार नहीं मिला और सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।













