बिलासपुर। अदालत में जमा होने वाली जुर्माने की रकम को सरकारी खजाने में जमा करने के बजाय हड़पने और न्यायालयीन रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा करने के मामले में कोर्ट ने तत्कालीन क्रिमिनल प्रेजेंटर विवेक सिंह क्षत्री को दोषी ठहराया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट असलम खान की अदालत ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में कुल सात साल तक के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
कोर्ट सूत्रों के अनुसार विवेक सिंह क्षत्री कोटा न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट के क्रिमिनल प्रेजेंटर के रूप में पदस्थ था। आरोप है कि 11 दिसंबर 2021 से 19 अप्रैल 2022 के बीच अदालत द्वारा लगाए गए जुर्माने की राशि को जिला कोषालय में जमा करने के बजाय उसने गबन कर लिया। इसके साथ ही रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया।
मामला वर्ष 2024 में सामने आया, जब बिलासपुर जिला न्यायालय के उप अधीक्षक ने कोटा न्यायालय के रिकॉर्ड मंगवाकर उनका ऑडिट कराया। ऑडिट में करीब 1.88 लाख रुपये की जुर्माना राशि के गबन और रिकॉर्ड में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
मामले की रिपोर्ट प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देश पर सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस ने जांच के दौरान दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाए, गवाहों के बयान दर्ज किए और आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।
प्रकरण में अभियोजन की ओर से DPO श्वेता नंदे ने उप संचालक अभियोजन आशीष झा के निर्देश पर पैरवी की। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए।
अदालत ने धारा 409 के तहत सात वर्ष का कारावास और 2,000 रुपये जुर्माना, धारा 466 में पांच वर्ष और 2,000 रुपये, धारा 467 में सात वर्ष और 2,000 रुपये, धारा 468 में पांच वर्ष और 2,000 रुपये तथा धारा 471 में दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
इसके अलावा धारा 474 के तहत पांच वर्ष और 2,000 रुपये जुर्माना तथा धारा 201 के तहत दो वर्ष के कारावास से दंडित किया गया। सभी धाराओं में लगाए गए जुर्माने की कुल राशि 10 हजार रुपये है।














