बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन के इस्तेमाल के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने निगरानी जारी रखने का फैसला किया है। मुख्य सचिव की ओर से दाखिल शपथपत्र में मई और जून 2026 के दौरान प्रदेशभर में चलाए गए स्वच्छता, जनजागरूकता और प्रतिबंधित प्लास्टिक जब्ती अभियान की जानकारी दी गई। कोर्ट ने अब तक की कार्रवाई को संतोषजनक माना, लेकिन मामले की मॉनिटरिंग जारी रखने के साथ मुख्य सचिव को नया शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

रायपुर निवासी नितिन सिंहवी की ओर से प्रतिबंधित प्लास्टिक के प्रभावी नियंत्रण को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं।

मुख्य सचिव के शपथपत्र के मुताबिक रायपुर में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के निर्माताओं और उपयोगकर्ताओं पर कार्रवाई करते हुए 7 लाख 26 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। एक प्लास्टिक निर्माता के खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया गया है।

वहीं, बिलासपुर, बोदरी और तखतपुर में विशेष अभियान चलाकर 386 किलो प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक जब्त किया गया और 93,100 रुपये का जुर्माना वसूला गया।

अरपा घाट से बाजारों तक चला अभियान

हाईकोर्ट के 13 मई 2026 के निर्देश के बाद सार्वजनिक स्थलों, बाजारों और जलस्रोतों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। बिलासपुर में अरपा नदी के घाट, मंगल भवन, रविदास चौक, जतिया तालाब, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बुधवारी बाजार समेत कई स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाया गया।

नगर निगम, जिला पंचायत और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के संयुक्त अभियान में करीब 9,016 लोगों ने श्रमदान किया। इसके अलावा रिवर व्यू रोड, नूतन चौक, गोल बाजार और हैप्पी स्ट्रीट में नुक्कड़ नाटक और जागरूकता रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें करीब 8,836 लोगों ने हिस्सा लिया। लोगों को कचरे के पृथक्करण के प्रति जागरूक किया गया और चार रंगों वाले डस्टबिन भी वितरित किए गए।

किन वस्तुओं पर है प्रतिबंध

राज्य में प्लास्टिक कैरी बैग, डिस्पोजेबल कप, प्लेट, ग्लास और चम्मच, स्ट्रॉ, थर्मोकोल से बने सजावटी सामान, 200 मिलीलीटर से कम क्षमता वाली PET बोतल और विज्ञापन में इस्तेमाल होने वाले फ्लेक्स बैनर प्रतिबंधित हैं।

हालांकि, दवाओं की पैकेजिंग और 50 माइक्रोन से अधिक मोटाई वाले दूध के पैकेट जैसी आवश्यक वस्तुओं को नियमों के तहत छूट दी गई है।

हाईकोर्ट ने मामले में निगरानी जारी रखते हुए राज्य सरकार से प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति का ताजा ब्योरा मांगा है। इस बीच, नवंबर 2025 में आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा उच्चस्तरीय समिति के गठन के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश के बावजूद छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की ओर से ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने का मुद्दा भी सुनवाई में सामने आया।

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