मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के काफिले के वाहन पर गिरा था टोल बूम; कर्मचारी ने माफी मांगी, फिर भी मारपीट- FIR नहीं होने पर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के काफिले के दौरान टोल प्लाजा पर हुए विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। आरोप है कि टोल बैरियर का बूम वाहन पर गिरने से नाराज मंत्री के निजी सहायक (PA) ओम प्रकाश राजवाड़े ने टोल कर्मचारी के साथ गाली-गलौज की और उसे लगातार पांच थप्पड़ जड़ दिए। पूरी घटना टोल प्लाजा पर लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है।

मामला लखनपुर थाना क्षेत्र के लहपटरा टोल प्लाजा का है। घटना 2 सितंबर की देर रात करीब 12:30 बजे की बताई जा रही है, जब मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े बिलासपुर से अंबिकापुर की ओर जा रही थीं।

पहले निकली इनोवा, पीछे आ रही फॉर्च्यूनर पर गिरा बैरियर

जानकारी के मुताबिक मंत्री के काफिले में दो वाहन थे। सबसे आगे चल रही इनोवा टोल बैरियर पार कर गई। इसके बाद मंत्री की फॉर्च्यूनर जैसे ही टोल लेन से गुजर रही थी, अचानक बैरियर का बूम आर्म नीचे आ गया और वाहन से टकरा गया।

इससे वाहन को नुकसान पहुंचा। घटना के बाद काफिले के दोनों वाहन रुक गए। इसी दौरान मंत्री के PA ओम प्रकाश राजवाड़े कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों के साथ वाहन से उतरे और टोल बूथ की ओर पहुंचे।

आरोप है कि उन्होंने टोल कर्मचारी महेंद्र राजवाड़े के साथ पहले गाली-गलौज की और फिर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी।

माफी मांगता रहा कर्मचारी, फिर भी बरसते रहे थप्पड़

CCTV फुटेज में दिखाई दे रहे घटनाक्रम के मुताबिक, टोल कर्मचारी महेंद्र राजवाड़े खुद को बचाने की कोशिश करता नजर आता है। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि वह लगातार माफी मांगता रहा, लेकिन इसके बावजूद PA ने उसे कई थप्पड़ मारे।

बताया गया है कि विवाद बढ़ता देख सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव किया और PA को वहां से वापस वाहन की ओर ले गए।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े वाहन से बाहर नहीं निकलीं और वाहन के भीतर ही मौजूद रहीं।

अगले दिन थाने पहुंचा कर्मचारी, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

घटना के अगले दिन 3 सितंबर को टोल कर्मचारी महेंद्र राजवाड़े अपने साथियों और ग्रामीणों के साथ लखनपुर थाने पहुंचा और मारपीट को लेकर लिखित शिकायत दी। पुलिस की ओर से उसकी मेडिकल-लीगल प्रक्रिया (MLC) पूरी किए जाने की जानकारी है।

महेंद्र के साथ थाने पहुंचे ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस ने मामले में FIR दर्ज नहीं की तो लहपटरा के ग्रामीण आंदोलन करेंगे।

गुरुवार शाम तक FIR दर्ज नहीं होने की बात सामने आई थी। हालांकि, पुलिस की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट किया जाना बाकी है।

बैरियर गिरने की वजह भी सामने आई

घटना के पीछे टोल बैरियर के स्वत: नीचे आने की वजह बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अपने काफिले का आकार कम किया है और फॉलो वाहन को हटा दिया गया है।

बताया जा रहा है कि सामान्य तौर पर काफिले की पहली गाड़ी निकलने के बाद पीछे आने वाले वाहन के लिए टोल कर्मचारी बैरियर को ऊपर रखते हैं। इसके लिए उन्हें फॉलो वाहन की मौजूदगी से काफिले की पहचान हो जाती है।

इस मामले में केवल दो वाहन होने के कारण आगे चल रही इनोवा के टोल पार करते ही सिस्टम के अनुसार बैरियर नीचे आ गया। टोल कर्मचारियों को पीछे मंत्री का वाहन आने का अंदाजा नहीं हो सका और इसी दौरान बूम आर्म फॉर्च्यूनर पर गिर गया।

वाहन क्षतिग्रस्त हुआ, लेकिन विवाद अब कानून-व्यवस्था का सवाल

टोल बैरियर गिरने से मंत्री के वाहन को नुकसान होना एक अलग मामला है, लेकिन उसके बाद टोल कर्मचारी के साथ कथित मारपीट ने पूरे घटनाक्रम को गंभीर बना दिया है। अब निगाह पुलिस की कार्रवाई पर है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि CCTV में घटना रिकॉर्ड हुई है और कर्मचारी ने लिखित शिकायत भी दी है, तो पुलिस इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करती है?

लहपटरा के ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि FIR दर्ज नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ऐसे में मामला केवल टोल बैरियर और वाहन को हुए नुकसान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कानून के सामने सभी की बराबरी और एक आम कर्मचारी की शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई का सवाल भी बन गया है।

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