NEP-2020 के बड़े और बहुविषयक संस्थानों के लक्ष्य के बीच छोटे विश्वविद्यालयों पर उठे सवाल
पीएचडी पंजीयन और अव्यवहारिक पाठ्यक्रमों की भी होगी विशेषज्ञों से समीक्षा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के स्तर और निजी विश्वविद्यालयों की उपयोगिता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। राज्य में संचालित करीब 20 निजी विश्वविद्यालयों में से लगभग छह विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 1,000 से भी कम पाई गई है। इस स्थिति पर राज्यपाल रमेन डेका ने चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को तत्काल कम से कम 1,000 विद्यार्थियों के नामांकन का आधार तैयार करने की दिशा में काम करना होगा।
राज्यपाल ने यह बात लोक भवन में निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कही। बैठक में करीब 20 निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हुए। विद्यार्थियों की संख्या से संबंधित आंकड़े सामने आने के बाद राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की वास्तविक उपयोगिता, शैक्षणिक गुणवत्ता और संस्थागत स्थायित्व को लेकर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 20 निजी और छह सरकारी विश्वविद्यालय हैं। ऐसे में करीब 30 प्रतिशत निजी विश्वविद्यालयों का 1,000 से कम विद्यार्थियों के साथ संचालित होना उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
‘विश्वविद्यालय केवल नाम का न रह जाए’
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या एक औसत बड़े उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से भी कम हो, तो उसके विश्वविद्यालय के रूप में संचालन की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कम नामांकन का सीधा असर पाठ्यक्रमों की विविधता, शिक्षकों की शैक्षणिक गतिविधियों, शोध वातावरण और विद्यार्थियों के बीच अकादमिक संवाद पर पड़ सकता है।
बैठक में मौजूद शिक्षाविद् डॉ. जवाहर सूरिसेट्टी ने भी विश्वविद्यालय और कॉलेज के बीच अंतर को केवल नाम या कानूनी दर्जे तक सीमित नहीं रखने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, विद्यार्थियों की पर्याप्त संख्या और शोध गतिविधियां किसी उच्च शिक्षण संस्थान को जीवंत विश्वविद्यालयी वातावरण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि नीति का लक्ष्य बड़े, बहुविषयक और स्वायत्त उच्च शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा देना है। ऐसे में उन संस्थानों की स्थिति पर भी विचार होना चाहिए जो विश्वविद्यालय का दर्जा तो रखते हैं, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या अपेक्षाकृत बहुत कम है।
कम मांग वाले पाठ्यक्रम भी चिंता का विषय
समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों ने निजी उच्च शिक्षा क्षेत्र की एक बड़ी समस्या की ओर भी ध्यान खींचा है। कई संस्थानों में ऐसे डिग्री पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं जिनकी विद्यार्थियों के बीच मांग बहुत कम है। इसका परिणाम कम नामांकन के रूप में सामने आ रहा है।
राज्यपाल की ओर से पहले ही संदिग्ध पीएचडी पंजीयनों की विशेषज्ञों से जांच कराने और ऐसे पाठ्यक्रमों को बंद करने पर जोर दिया गया है, जिनकी उपयोगिता या व्यवहार्यता संदिग्ध है। अब कम छात्र संख्या वाले विश्वविद्यालय भी समीक्षा के दायरे में आ गए हैं।
राज्यपाल के 1,000 विद्यार्थियों के न्यूनतम आधार पर जोर को केवल नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य नहीं, बल्कि संस्थानों की शैक्षणिक और आर्थिक व्यवहार्यता की कसौटी के तौर पर देखा जा रहा है।
NEP-2020 के लक्ष्य से कितना मेल खाती है मौजूदा तस्वीर?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 उच्च शिक्षा को छोटे-छोटे और अलग-अलग संस्थानों में बिखरे मॉडल से निकालकर बड़े, बहुविषयक और अधिक स्वायत्त संस्थानों की दिशा में ले जाने पर जोर देती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में कुछ विश्वविद्यालयों का बेहद कम छात्र संख्या के साथ संचालन नीति के व्यापक उद्देश्यों के संदर्भ में भी सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालय में केवल डिग्री पाठ्यक्रम चलना पर्याप्त नहीं है। वहां पर्याप्त विद्यार्थी, विविध विषय, योग्य संकाय, शोध गतिविधियां, नवाचार और बेहतर शैक्षणिक वातावरण भी होना चाहिए। कम नामांकन वाले संस्थानों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि उनकी समस्या अस्थायी है या लंबे समय से बनी हुई है।
नियामक व्यवस्था पर भी बढ़ेगा दबाव
कम छात्र संख्या के साथ संचालित विश्वविद्यालयों का मुद्दा अब राज्य की उच्च शिक्षा नियामक व्यवस्था के सामने भी चुनौती बन सकता है। सवाल यह है कि नए विश्वविद्यालयों को मंजूरी देते समय उनकी संभावित मांग, क्षेत्रीय जरूरत, पाठ्यक्रमों की उपयोगिता और दीर्घकालिक व्यवहार्यता का कितना आकलन किया गया।
राज्यपाल के निर्देश के बाद अब निजी विश्वविद्यालयों को अपने नामांकन, पाठ्यक्रमों, शोध गतिविधियों और संस्थागत क्षमता पर अधिक गंभीरता से काम करना होगा। खासतौर पर उन संस्थानों के सामने चुनौती बड़ी है जिनकी विद्यार्थी संख्या 1,000 से काफी नीचे है।
राज्यपाल का संदेश स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय केवल नाम या डिग्री बांटने वाली संस्था नहीं, बल्कि ज्ञान, शोध, कौशल और नवाचार का मजबूत केंद्र होना चाहिए। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कम नामांकन वाले संस्थान 1,000 विद्यार्थियों के लक्ष्य तक पहुंच पाते हैं या उनकी संस्थागत व्यवहार्यता पर नए सिरे से सवाल खड़े होते हैं।














