101 गवाहों के बयान और दस्तावेजों के आधार पर फैसला; 16 सितंबर को सजा पर होगा फैसला
कांग्रेस ने कहा- बड़े साजिशकर्ता अब भी बाहर, पूर्व CM भूपेश बघेल ने जांच पर उठाए सवाल
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक और नक्सली हमलों में शामिल झीरम घाटी हत्याकांड मामले में 13 साल बाद शुक्रवार को बड़ा न्यायिक फैसला आया। जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। मामले में कुल 11 आरोपी थे, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी। अदालत अब दोषियों को सजा की मात्रा पर 16 सितंबर को फैसला सुनाएगी।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान और विभिन्न दस्तावेज अदालत के सामने पेश किए। अंतिम बहस अगस्त में पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती दी थी, जबकि अभियोजन ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध होने का दावा किया था। दोषी ठहराए गए लोगों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने फैसले पर असंतोष जताते हुए कहा कि आदेश की प्रति मिलने के बाद इसके आधारों का अध्ययन किया जाएगा और हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।
25 मई 2013 को दहली थी झीरम घाटी
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था। उस समय प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही थीं और कांग्रेस अपनी ‘परिवर्तन यात्रा’ के जरिए चुनावी अभियान को गति दे रही थी। सुकमा में आयोजित सभा के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला जगदलपुर लौट रहा था। इसी दौरान दरभा थाना क्षेत्र की झीरम घाटी में माओवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया।
एनआईए के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, करीब शाम 4.15 बजे कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हमला किया गया। हमले में 27 लोगों की मौत हुई, जिनमें 10 पुलिसकर्मी शामिल थे, जबकि 38 लोग घायल हुए। एनआईए ने इस मामले को RC-06/2013/NIA/DLI के रूप में दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली थी।
हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं सलवा जुडूम के प्रमुख चेहरों में रहे महेंद्र कर्मा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख नेता मारे गए। पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल भी गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
हमला इतना व्यापक था कि इसे उस समय छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर सबसे बड़े हमलों में गिना गया। जांच के दौरान हथियार और विस्फोटक सामग्री लूटे जाने की बात भी सामने आई। एनआईए के अनुसार हमले के बाद फरार आरोपियों के खिलाफ आगे की जांच जारी रखी गई थी।
कांग्रेस ने फैसले के बाद फिर उठाया ‘बड़ी साजिश’ का सवाल
अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने कहा कि न्याय की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने दावा किया कि बस्तर की जनता जानती है कि कांग्रेस नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की हत्या के पीछे बड़ी राजनीतिक साजिश थी। उनका आरोप है कि दोषी ठहराए गए लोग नक्सली संगठन के बड़े स्तर के नेता नहीं हैं और हमले के कथित मुख्य साजिशकर्ताओं तक जांच नहीं पहुंची।
महेंद्र कर्मा की पुत्री तुलिका कर्मा ने भी जांच को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हमले के समय मौके पर मौजूद रहे कुछ लोगों से भी समुचित पूछताछ नहीं की गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर आगे न्यायिक लड़ाई जारी रखेंगे।
भूपेश बघेल ने NIA की जांच पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी लंबे समय से झीरम मामले की जांच को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि जांच के दौरान वास्तविक साजिशकर्ताओं की पहचान करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए। बघेल ने यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम दरभा थाने में दर्ज मूल एफआईआर में थे, उनसे भी एनआईए ने पूछताछ नहीं की।
बघेल के अनुसार, उनके मुख्यमंत्री रहते राज्य सरकार ने झीरम मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी, लेकिन एनआईए ने इस कदम को हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उन्होंने दावा किया कि शीर्ष अदालत से राज्य सरकार के पक्ष में फैसला आने तक सरकार का कार्यकाल समाप्त हो चुका था।
जांच, आयोग और राजनीतिक विवाद का लंबा सिलसिला
झीरम कांड की जांच को लेकर अब तक दो न्यायिक जांच आयोग गठित किए जा चुके हैं। 2013 में न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में आयोग बनाया गया था, जिसे सुरक्षा व्यवस्था, मानक संचालन प्रक्रिया, रैली आयोजकों की भूमिका और पुलिस बलों के बीच समन्वय जैसे पहलुओं की जांच करनी थी।
बाद में 2021 में दूसरी न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया। इसमें न्यायमूर्ति सतीश अग्निहोत्री और न्यायमूर्ति गुलाम मिन्हाजुद्दीन को जिम्मेदारी दी गई। भाजपा नेता धरमलाल कौशिक ने आयोग के गठन को हाईकोर्ट में चुनौती दी और इसकी कार्यवाही पर रोक लगी हुई है।
एनआईए ने 2014 में पहला आरोपपत्र दाखिल किया था और बाद में पूरक आरोपपत्र भी पेश किया। एजेंसी के आधिकारिक रिकॉर्ड में फरार आरोपियों के खिलाफ आगे की जांच जारी रहने की बात दर्ज है।
अब नजर 16 सितंबर पर
13 साल लंबी सुनवाई के बाद 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने से मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव आया है। दोषियों को सजा 16 सितंबर को सुनाया जाएगा। हालांकि, सजा कितनी होगी और आगे हाईकोर्ट में अपील का क्या रुख रहेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। वहीं राजनीतिक स्तर पर यह बहस अभी भी कायम है कि क्या झीरम घाटी हमले के पीछे के सभी कथित साजिशकर्ताओं तक जांच पहुंच पाई है।














