सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद छत्तीसगढ़ की प्रक्रिया पर उठे सवाल, दो सप्ताह में जवाब देने का निर्देश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में मेडिकल, डेंटल और फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों से अनिवार्य रूप से लिए जाने वाले बांड और उसकी राशि को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से जवाब मांगा है। कोर्ट ने बांड राशि तय करने की प्रक्रिया और उसके औचित्य को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले की कसौटी पर परखने की जरूरत बताई है।
मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने 24 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए एनएमसी को इस संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। मामला अर्पिता वर्मा एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य से संबंधित है।
2025 के प्रवेश नियमों पर भी जांच
याचिका में छत्तीसगढ़ मेडिकल, डेंटल एंड फिजियोथेरेपी अंडरग्रेजुएट एडमिशन रूल्स, 2025 के नियम 10(ii) और 10(iii) के तहत निर्धारित बांड राशि को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के प्रकाश में यह देखना जरूरी है कि बांड राशि तय करने के पीछे अपनाई गई प्रक्रिया तार्किक और उचित है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ताओं की ओर से Association of Medical Super Speciality Aspirants and Residents बनाम Union of India मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले का हवाला दिया गया। इस फैसले में सरकारी चिकित्सा संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टरों के लिए अनिवार्य सेवा और बांड की व्यवस्था को पूरी तरह अनुचित नहीं माना गया था, लेकिन सेवा अवधि और बांड की राशि के तर्कसंगत होने पर जोर दिया गया था।
हाई कोर्ट के समक्ष अब मुख्य सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ में मेडिकल विद्यार्थियों पर लागू बांड राशि किस आधार पर निर्धारित की गई और क्या इसके निर्धारण की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप है।
दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव के साथ अधिवक्ता सजल कुमार गुप्ता और काजल चंद्रा उपस्थित हुए। राज्य सरकार की ओर से उप शासकीय अधिवक्ता अनुजा शर्मा तथा एनएमसी की ओर से अधिवक्ता अनिरुद्ध श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। हाई कोर्ट ने मामले को दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
फिलहाल हाई कोर्ट ने बांड राशि को अवैध घोषित नहीं किया है। अदालत ने एनएमसी से संबंधित प्रक्रिया और उठाए गए कदमों पर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई में एनएमसी के जवाब के बाद इस मुद्दे पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया स्पष्ट होगी।














