शासकीय भूमि की प्रकृति बदलने के मामले में हुई थी कार्रवाई; कोर्ट ने कहा- उसी मामले में पहले से जारी अंतरिम आदेश के बावजूद किया गया निलंबन

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तहसीलदार माया आंचल लहरे के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 16 जुलाई 2026 को उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह मामला रायगढ़ जिले की पुसौर तहसील में वर्ष 2020 में राजस्व अभिलेखों में भूमि की प्रकृति बदलने से जुड़ा है। वर्तमान में माया आंचल लहरे कांकेर जिले में तहसीलदार के पद पर पदस्थ थीं।

2020 में बदली गई थी जमीन की प्रकृति

मामले के अनुसार, माया आंचल लहरे पुसौर तहसीलदार के पद पर पदस्थ रहते हुए 28 अक्टूबर 2020 को ग्राम पुसौर की खसरा नंबर 16/2-बी की भूमि के संबंध में आदेश पारित किया था। इस आदेश में राजस्व रिकॉर्ड से ‘शासकीय छोटा झाड़ जंगल’ की प्रविष्टि हटाकर उसके स्थान पर आनंद राम का नाम दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

इस आदेश के खिलाफ छत्तीसगढ़ भू-राजस्व मंडल, बिलासपुर के समक्ष पुनरीक्षण आवेदन प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के बाद 21 अगस्त 2025 को बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के अध्यक्ष ने तहसीलदार और हल्का पटवारी को भूमि की प्रकृति बदलने के लिए जिम्मेदार माना था।

बोर्ड ने सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना शासकीय भूमि की प्रकृति बदलकर राजस्व रिकॉर्ड में संशोधन किए जाने पर संबंधित तहसीलदार और पटवारी के खिलाफ प्रशासनिक एवं विभागीय कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव को पत्र भेजा था।

पहले ही विभागीय जांच के निर्देश वाले हिस्से पर लगाई थी रोक

भू-राजस्व मंडल के आदेश के खिलाफ माया आंचल लहरे ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी याचिका WPS No. 1785/2026 में हाईकोर्ट ने 17 फरवरी 2026 को अंतरिम राहत देते हुए बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के उस हिस्से पर रोक लगा दी थी, जिसमें तहसीलदार के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया था।

यह अंतरिम आदेश अभी भी प्रभावी है और मूल याचिका हाईकोर्ट में लंबित है।

उसी आधार पर निलंबन को दी चुनौती

इसी बीच राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अवर सचिव ने 16 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(a) के तहत माया आंचल लहरे को निलंबित कर दिया।

निलंबन आदेश के खिलाफ उन्होंने अधिवक्ता नरेंद्र मेहर के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 10 सितंबर 2026 को जस्टिस बी.डी. गुरु की अदालत में मामले की सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता अपूर्वा पांडेय ने तर्क दिया कि निलंबन उन्हीं तथ्यों और आरोपों के आधार पर किया गया है, जिनसे संबंधित विभागीय जांच शुरू करने वाले भू-राजस्व मंडल के आदेश पर हाईकोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है।

हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया

अदालत ने प्रथम दृष्टया इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए निलंबन आदेश पर रोक लगाई और मामले में जवाब तलब किया। कोर्ट ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव, अवर सचिव, भू-राजस्व मंडल बिलासपुर, बिलासपुर संभाग के आयुक्त तथा रायगढ़ और कांकेर के कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।

मामले में अब राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी।

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