राजस्व मामले में सामने आई चूक पर नाराजगी, पहले ही निपट चुके प्रकरण को लंबित मानकर जारी हुआ था 30 दिन में फैसला करने का आदेश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राजस्व संबंधी एक मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ताओं और पक्षकारों के वकीलों को महत्वपूर्ण हिदायत दी है। कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष सही और संपूर्ण तथ्य रखना बेहद जरूरी है। किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाने या गलत जानकारी सामने आने से न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि संबंधित अधिकारियों के लिए भी अनावश्यक भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
मामले में हाईकोर्ट के संज्ञान में आया कि जिस राजस्व प्रकरण को लंबित मानते हुए बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को 30 दिन के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था, उसका फैसला करीब नौ महीने पहले ही हो चुका था।
पहले ही हो चुका था मामले का निराकरण
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि संबंधित राजस्व प्रकरण का 6 अगस्त 2025 को ही कमिश्नर स्तर पर निराकरण कर दिया गया था। इस आदेश की जानकारी ऑनलाइन रिकॉर्ड में भी दर्ज थी।
हालांकि, हाईकोर्ट में सुनवाई के समय कमिश्नर का यह आदेश अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। परिणामस्वरूप कोर्ट ने मामले को लंबित समझते हुए कमिश्नर को 30 दिनों के भीतर इसका निराकरण करने का निर्देश दे दिया।
पुराने आदेश की जानकारी नहीं देने से बनी स्थिति
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि 6 अगस्त 2025 के कमिश्नर के आदेश को सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में नहीं लाया गया था। इसके कारण हाईकोर्ट ने ऐसी कार्रवाई का निर्देश दे दिया, जिसका पालन व्यवहारिक रूप से संभव नहीं था, क्योंकि मामला पहले ही निपटाया जा चुका था।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता ने महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने नहीं रखा और अधूरी जानकारी के आधार पर आदेश प्राप्त किया।
वकीलों और पक्षकारों को सतर्क रहने की सलाह
हाईकोर्ट ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए कहा कि राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ताओं के साथ-साथ अन्य पक्षों के वकीलों और पक्षकारों को भी सुनवाई के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किसी भी तथ्य में वास्तविकता होनी चाहिए। महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने या अधूरी जानकारी देने से न्यायिक आदेश प्रभावित हो सकता है और प्रशासनिक स्तर पर भी अनावश्यक जटिलता पैदा हो सकती है।
इस मामले में सामने आई स्थिति के बाद हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और तथ्यात्मक सटीकता को लेकर यह सख्त संदेश दिया है।














