मौखिक समझौते और भुगतान के दावे की भी हो सकती है जांच, हाईकोर्ट ने RERA को नए सिरे से सुनवाई के निर्देश दिए
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर कि पक्षकारों के बीच लिखित आवंटन दस्तावेज या समझौता नहीं है, रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) का अधिकार क्षेत्र समाप्त नहीं हो जाता। कोर्ट ने कहा कि RERA कानून के तहत शिकायत दर्ज करने वाले “अग्रिग्रिव्ड पर्सन” (पीड़ित व्यक्ति) की परिभाषा व्यापक है।
जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने Fortune Resources की अपील खारिज करते हुए RERA को शिकायत पर कानून के अनुसार नए सिरे से निर्णय लेने के निर्देश दिए।
75 लाख के दुकान सौदे का विवाद
मामला रायपुर के हाई स्ट्रीट, स्वर्ण भूमि स्थित Rama World में दुकान नंबर J-03 से जुड़ा है। Y.P. Goel and Associates ने आरोप लगाया था कि Fortune Resources के साथ दुकान के आवंटन और बिक्री के लिए मौखिक समझौता हुआ था। 1,280 वर्गफीट की इस दुकान की कीमत करीब 75 लाख रुपये बताई गई थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने 31 दिसंबर 2020 को 5 लाख रुपये, 3 फरवरी 2021 को 10 लाख रुपये और 6 सितंबर 2022 को 10 लाख रुपये का भुगतान किया। इनमें शुरुआती दो भुगतान चेक के माध्यम से किए जाने का दावा किया गया।
शिकायत में कहा गया कि भुगतान के बावजूद दुकान का कब्जा नहीं दिया गया और बिक्री विलेख भी निष्पादित नहीं हुआ। बाद में कथित तौर पर 25 लाख रुपये की राशि करीब तीन साल बाद वापस कर दी गई। इसके बाद 5 अप्रैल 2024 को कानूनी नोटिस जारी किया गया।
हालांकि, Fortune Resources ने किसी भी मौखिक समझौते और दुकान के आवंटन से इनकार किया।
RERA ने लिखित समझौता नहीं होने पर खारिज की थी शिकायत
RERA ने 31 जुलाई 2024 को शिकायत खारिज करते हुए कहा था कि पक्षकारों के बीच कोई लिखित समझौता मौजूद नहीं है। साथ ही, कथित लेनदेन के लिए बिक्री राशि का स्पष्ट प्रमाण भी नहीं पाया गया। RERA ने यह भी माना था कि शिकायत उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।
इसके बाद Y.P. Goel and Associates ने रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल (REAT) का रुख किया। ट्रिब्यूनल ने 4 अप्रैल 2025 को RERA का आदेश निरस्त करते हुए माना कि RERA के तहत मौखिक समझौते पर भी विचार किया जा सकता है और शिकायतकर्ता “अग्रिग्रिव्ड पर्सन” है। ट्रिब्यूनल ने मामले को दोबारा विचार के लिए RERA भेज दिया था।
हाईकोर्ट ने Section 31 को बताया महत्वपूर्ण
Fortune Resources ने ट्रिब्यूनल के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। कंपनी का तर्क था कि केवल रकम जमा करने से शिकायतकर्ता RERA Act की धारा 2(d) के तहत “allottee” नहीं बन जाता। कंपनी के अनुसार, आवंटन के लिए पहले आवेदन या अनुरोध, फिर प्रमोटर की स्वीकृति और उसके बाद वास्तविक आवंटन होना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने पाया कि RERA ने शिकायत पर निर्णय लेते समय मुख्य रूप से “allottee” की परिभाषा पर ध्यान दिया, लेकिन धारा 31 के प्रावधानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया।
बेंच ने कहा कि धारा 31 के तहत किसी कानून, नियम या विनियम के उल्लंघन अथवा विरोधाभास की शिकायत करने वाले “अग्रिग्रिव्ड पर्सन” का दायरा काफी व्यापक है। इसलिए केवल लिखित दस्तावेज के अभाव को आधार बनाकर RERA के अधिकार क्षेत्र को खत्म नहीं किया जा सकता।
सबूत जुटाने की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि RERA के आदेश में इस बात पर चर्चा नहीं की गई कि छत्तीसगढ़ RERA नियम, 2017 के Rule 35(3) के तहत जांच की प्रक्रिया शुरू की गई थी या नहीं।
बेंच के अनुसार, शिकायत में दुकान के कथित आवंटन और बिक्री से संबंधित रकम जमा करने का लेनदेन सामने आया है। ऐसी स्थिति में RERA को दस्तावेज प्रस्तुत कराने या आवश्यक साक्ष्य हासिल करने की प्रक्रिया अपनाने के बाद मामले पर निर्णय लेना चाहिए था।
हाईकोर्ट ने Fortune Resources की अपील खारिज करते हुए कहा कि मामले में अपील स्वीकार करने के लिए कोई substantial question of law नहीं बनता। साथ ही RERA को निर्देश दिया कि वह अपीलेट ट्रिब्यूनल के निर्देशों और कानून के अनुरूप शिकायत का नए सिरे से फैसला करे।














