बेमेतरा के योगेश बंजारे शारीरिक परीक्षा में नहीं हो सके थे शामिल, हाईकोर्ट ने प्रक्रिया पूरी करने कहा
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फॉरेस्ट रेंजर भर्ती के एक अभ्यर्थी को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार और संबंधित भर्ती प्राधिकरण को दोबारा शारीरिक वॉक टेस्ट कराने का निर्देश दिया है। हादसे में घायल होने के कारण निर्धारित तिथि पर शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल नहीं हो सके बेमेतरा निवासी योगेश बंजारे को अब परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि वॉक टेस्ट के बाद भर्ती प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ाई जाए और पूरी प्रक्रिया आदेश प्राप्त होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर पूरी की जाए। यह आदेश जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने योगेश बंजारे की याचिका पर सुनाया।
हादसे के कारण नहीं दे पाए थे शारीरिक परीक्षा
बेमेतरा जिले के मारो गांव निवासी 33 वर्षीय योगेश बंजारे ने छत्तीसगढ़ वन सेवा (संयुक्त) परीक्षा 2020 के तहत फॉरेस्ट रेंजर पद के लिए आवेदन किया था। भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक दक्षता परीक्षा के तहत वॉक टेस्ट भी शामिल था।
परीक्षा की निर्धारित तारीख से पहले योगेश एक हादसे का शिकार हो गए और घायल हो गए। चोट के कारण वह निर्धारित दिन वॉक टेस्ट में शामिल नहीं हो सके। उनका कहना था कि उन्होंने भर्ती प्राधिकरण को पहले ही अपनी स्थिति की जानकारी दे दी थी। इसके लिए 4 सितंबर 2023 और 11 सितंबर 2023 को संबंधित अधिकारियों को आवेदन भी दिए गए थे।
पहले भी हाईकोर्ट पहुंचे थे अभ्यर्थी
योगेश ने इस मामले को लेकर वर्ष 2024 में भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 16 अगस्त 2024 को याचिका का निराकरण करते हुए अदालत ने उन्हें संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन देने की स्वतंत्रता दी थी।
इसके बाद योगेश ने आवश्यक दस्तावेजों के साथ अभ्यावेदन प्रस्तुत किया, लेकिन अधिकारियों ने 7 अक्टूबर 2025 को उनका दावा खारिज कर दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गौतम खेत्रपाल ने दलील दी कि अभ्यर्थी ने शारीरिक परीक्षा से पहले ही अपनी चोट और बीमारी की स्थिति की जानकारी भर्ती प्राधिकरण को दे दी थी। इसलिए उसे परीक्षा का एक और अवसर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के महेंद्र प्रताप सिंह एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य, (2019) 13 SCC 706 मामले के फैसले का हवाला दिया। इस मामले में उन अभ्यर्थियों को राहत दी गई थी, जिन्होंने शारीरिक दक्षता परीक्षा से पहले या उसके समय अपनी बीमारी की जानकारी दी थी।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि जिन फॉरेस्ट रेंजर पदों के लिए उसने आवेदन किया था, उनमें कुछ पद अब भी रिक्त हैं।
सरकार ने कहा- दोबारा परीक्षा का कोई प्रावधान नहीं
राज्य की ओर से अधिवक्ता विवेक वर्मा ने याचिका का विरोध किया। उनका तर्क था कि राज्य सरकार के किसी नियम या परिपत्र में निर्धारित तिथि की शारीरिक दक्षता परीक्षा स्थगित करने या दोबारा परीक्षा कराने का प्रावधान नहीं है।
सरकार ने यह स्वीकार किया कि योगेश ने परीक्षा से पहले अपनी चिकित्सकीय स्थिति की जानकारी अधिकारियों को दी थी, लेकिन इसके बाद उन्हें कोई वैकल्पिक तारीख नहीं दी गई।
हाईकोर्ट ने कहा- पहले दी गई थी सूचना
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि योगेश ने शारीरिक परीक्षा से पहले ही हादसे और अपनी स्थिति की जानकारी अधिकारियों को दी थी। राज्य की ओर से भी इस तथ्य से इनकार नहीं किया गया।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले और फॉरेस्ट रेंजर के पद रिक्त होने संबंधी याचिकाकर्ता के तर्क को भी ध्यान में रखा। इसके बाद अदालत ने योगेश को शारीरिक वॉक टेस्ट में शामिल होने का अवसर देने का निर्देश दिया।
अब संबंधित विभाग को दोबारा शारीरिक परीक्षा आयोजित कर उसके परिणाम के आधार पर भर्ती प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ानी होगी। हाईकोर्ट ने पूरी प्रक्रिया 60 दिनों में पूरी करने की समय-सीमा तय की है।














