रायपुर के युवक को राहत, 2021 में जारी छत्तीसगढ़ आदेश अदालत ने किया निरस्त

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य महिला आयोग की शक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए वर्ष 2021 में जारी एक आदेश को निरस्त कर दिया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने रायपुर निवासी रमेश कुमार साहू की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि महिला आयोग की भूमिका मुख्य रूप से तथ्य जुटाने और सिफारिश करने तक सीमित है। आयोग अपने इन अधिकारों को न्यायिक निर्णय देने की शक्ति में परिवर्तित नहीं कर सकता।

रमेश कुमार साहू, कुशालपुर निवासी 36 वर्षीय युवक हैं। मामले में उनकी पड़ोसी दीपिका बक्शी ने महिला आयोग में शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रमेश कुमार ने उन्हें ‘टोनही’ कहकर संबोधित किया और जादू-टोना करने का आरोप लगाया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता केपीएस गांधी ने कोर्ट में तर्क दिया कि आयोग ने पुरानी बस्ती थाने में छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। उनके अनुसार, इस तरह का निर्देश देना आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर था।

हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के Bhawani Prasad Jena vs State Commission for Women, Odisha और Mumbai Port Authority vs National Commission for Scheduled Castes सहित पूर्व निर्णयों का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि आयोग के पास तथ्यात्मक जांच और सिफारिश करने की सीमित शक्तियां हैं। वह किसी विवाद पर न्यायिक अथवा निर्णायक अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता।

रमेश कुमार की ओर से यह भी कहा गया कि आयोग की कार्यवाही से पहले उन्हें उचित नोटिस नहीं मिला था। उन्हें फोन पर 20 अक्टूबर 2021 को उपस्थित होने के लिए कहा गया था। उनका आरोप था कि पहली ही सुनवाई में शिकायतकर्ता के आरोपों को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी की गई।

वहीं आयोग की ओर से अधिवक्ता विक्रम शर्मा ने तर्क दिया कि आदेश एफआईआर दर्ज करने का बाध्यकारी निर्देश नहीं, बल्कि सिफारिश मात्र था और आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई की थी। राज्य और शिकायतकर्ता की ओर से भी याचिका का विरोध किया गया।

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 20 अक्टूबर 2021 के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर मानते हुए निरस्त कर दिया।

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