रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सब-कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के नाम पर रकम लेने का आरोप, दुबई, हांगकांग, चीन और सिंगापुर तक पहुंचा पैसा; 11.60 करोड़ रुपये अब भी बकाया

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कथित 15 करोड़ रुपये की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ केके श्रीवास्तव के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने उनकी 3.25 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। इसके साथ ही 23 सितंबर को रायपुर की विशेष PMLA अदालत में उनके खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई है।

ED की जांच में सामने आया है कि कथित ठगी की रकम को कई बैंक खातों और कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर करने के बाद विदेशों तक भेजा गया। एजेंसी के मुताबिक, इस रकम का एक हिस्सा दुबई, हांगकांग, चीन और सिंगापुर में मौजूद लाभार्थियों तक पहुंचा। मामले में कुल 15 करोड़ रुपये में से 11.60 करोड़ रुपये अब भी वापस नहीं किए गए हैं।

500 करोड़ के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सब-कॉन्ट्रैक्ट दिलाने का दिया था झांसा

ED के अनुसार, मामले की शुरुआत जून 2023 में हुई थी। आरोप है कि केके श्रीवास्तव ने रावत एसोसिएट्स के संचालक को रायपुर में करीब 500 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सब-कॉन्ट्रैक्ट दिलाने का भरोसा दिया था।

इसके लिए उन्होंने कथित तौर पर 15 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा कराने की बात कही। एजेंसी का आरोप है कि इसी भरोसे पर कारोबारी ने रकम दे दी, लेकिन जिस परियोजना के नाम पर पैसा लिया गया, उससे जुड़ा प्रस्ताव फर्जी था।

इस मामले में तेलीबांधा थाने में दर्ज प्राथमिकी और छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। मूल मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक धमकी और साजिश से संबंधित आरोप शामिल हैं।

पांच बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई रकम

जांच एजेंसी के मुताबिक, 15 करोड़ रुपये सीधे एक खाते में लेने के बजाय पांच अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराए गए थे। इन खातों का विवरण कथित तौर पर व्हाट्सऐप के जरिए कारोबारी को भेजा गया था।

ED का दावा है कि जिन लोगों के नाम पर ये बैंक खाते खोले गए थे, उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। साथ ही, जिन कंपनियों के नाम पर खाते संचालित किए जा रहे थे, वे अपने पंजीकृत पते पर मौजूद नहीं मिलीं।

जांच में यह भी सामने आया कि रकम को कई शेल कंपनियों और अन्य संस्थाओं के जरिए अलग-अलग खातों में भेजा गया, ताकि उसके वास्तविक स्रोत और इस्तेमाल को छिपाया जा सके।

फर्जी कारोबारी लेन-देन दिखाकर विदेश भेजी गई रकम

ED के मुताबिक, कथित ठगी से प्राप्त रकम का एक हिस्सा भारत से बाहर भेजा गया। इसके लिए लेन-देन को वास्तविक कारोबारी भुगतान दिखाने की कोशिश की गई।

जांच एजेंसी का आरोप है कि फ्रेट चार्ज और कंटेनर लीजिंग जैसे कारोबारी विवरणों का इस्तेमाल कर रकम दुबई, हांगकांग, चीन और सिंगापुर तक पहुंचाई गई।

एजेंसी अब इस पूरे वित्तीय लेन-देन की कड़ियों और विदेशों में रकम प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की भूमिका की जांच कर रही है।

3.40 करोड़ रुपये लौटाए, लेकिन 11.60 करोड़ अब भी बकाया

जांच में सामने आए वित्तीय लेन-देन के मुताबिक, शिकायतकर्ता को करीब 3.40 करोड़ रुपये वापस किए गए थे।

हालांकि, ED का आरोप है कि यह रकम भी पहले से कई स्तरों पर घुमाए गए पैसों से लौटाई गई और इसे सामान्य कारोबारी भुगतान के रूप में दिखाने की कोशिश की गई।

एजेंसी के अनुसार, कुल 15 करोड़ रुपये में से 11.60 करोड़ रुपये अब तक वापस नहीं किए गए हैं। इसी कथित अपराध से अर्जित रकम से जुड़ी संपत्तियों को चिह्नित कर अटैच करने की कार्रवाई की गई है।

30 जुलाई को गिरफ्तार हुए थे केके श्रीवास्तव

ED ने केके श्रीवास्तव को 30 जुलाई 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें एजेंसी की हिरासत में भेजा गया था।

अब 23 सितंबर को अभियोजन शिकायत दाखिल किए जाने के साथ मामला अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ गया है। ED ने स्पष्ट किया है कि प्रकरण में जांच अभी जारी है।

3.25 करोड़ की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच

ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने 22 सितंबर को केके श्रीवास्तव से जुड़ी 3.25 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने का आदेश जारी किया था।

यह कार्रवाई कथित अपराध से अर्जित संपत्ति को सुरक्षित करने के उद्देश्य से की गई है। संपत्तियों के अटैचमेंट के बाद अब जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी और कथित लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है।

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