छत्तीसगढ़ की मतदाता सूची की समीक्षा की भी मांग

बिलासपुर। आम आदमी पार्टी की बिलासपुर इकाई ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राष्ट्रपति के नाम जिला निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। पार्टी नेताओं ने ज्ञापन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कई आरोप लगाए हैं।

ज्ञापन राज्य सह प्रभारी एवं धर्म रक्षक राकेश जाटव, प्रदेश संगठन सचिव सरदार जसवीर सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता प्रियंका शुक्ला और खगेश चंद्राकर सहित अन्य पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने सौंपा।

13.47 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप

AAP ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया की आड़ में 30 राज्यों में करीब 13.47 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। पार्टी ने इसे चुनाव प्रक्रिया में बड़ी अनियमितता बताया।

ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। AAP ने दावा किया कि सत्तारूढ़ भाजपा के शीर्ष नेताओं नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ मिलीभगत कर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने की साजिश की गई।

पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के बाद उसने इस संबंध में चुनाव आयोग के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग

AAP ने राष्ट्रपति से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनके खिलाफ आपराधिक साजिश और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने के आरोपों में एफआईआर दर्ज कराने तथा गिरफ्तारी की मांग की है।

पार्टी ने SIR प्रक्रिया की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है। ज्ञापन में कहा गया है कि जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जानी चाहिए।

पिछले दो वर्षों में हुए चुनावों की समीक्षा की मांग

ज्ञापन में पिछले दो वर्षों के दौरान विभिन्न राज्यों, जिसमें दिल्ली भी शामिल है, में हुए चुनावों की समीक्षा और मतदाता सूची से हटाए गए नामों का ऑडिट कराने की मांग की गई है। पार्टी ने पात्र नागरिकों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने की मांग भी रखी।

AAP ने छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची से हटाए गए नामों की भी समीक्षा करने की मांग की है।

पार्टी ने राष्ट्रपति से संविधान और नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए आवश्यक संवैधानिक कदम उठाने का आग्रह किया। ज्ञापन में कहा गया है कि चुनाव व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।

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