बिलासपुर। शादी के बाद बदला हुआ नाम और फिर वैवाहिक संबंध खत्म होने के बाद अपने पुराने नाम पर लौटना एक महिला के लिए सरकारी नौकरी की राह में बड़ी परेशानी बन गया। स्कूल के दस्तावेजों में नाम सुरभि यादव था, जबकि कॉलेज की डिग्रियों में सुहाना अंसारी दर्ज हो गया था। इस विसंगति के कारण सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करते समय उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए कॉलेज को शैक्षणिक रिकॉर्ड में मूल नाम बहाल करने का निर्देश दिया है।
शादी के बाद बदला था नाम
बिलासपुर निवासी सुरभि यादव ने 2009 में हाईस्कूल और 2011 में हायर सेकेंडरी की परीक्षा अपने मूल नाम से पास की थी। वर्ष 2012 में राजिक अहमद अंसारी से शादी के बाद उनका नाम सुहाना अंसारी हो गया।
इसके बाद उन्होंने 2013 से 2016 के बीच बिलासा कन्या महाविद्यालय से बीएससी होम साइंस की पढ़ाई की। वर्ष 2016-17 में एमएससी होम साइंस (ह्यूमन डेवलपमेंट) और 2018-19 में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन गाइडेंस एंड काउंसलिंग भी पूरा किया। इन सभी शैक्षणिक दस्तावेजों में उनका नाम सुहाना अंसारी दर्ज हुआ।
विवाह शून्य घोषित होने के बाद पुराने नाम पर लौटीं
24 फरवरी 2022 को बिलासपुर फैमिली कोर्ट ने उनका विवाह शून्य घोषित कर दिया। इसके बाद उन्होंने आधार कार्ड, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र सहित अन्य सरकारी दस्तावेजों में अपना मूल नाम सुरभि यादव बहाल करा लिया। उनके माता-पिता के नाम शिवशंकर यादव और सुलेखा यादव दर्ज हैं।
लेकिन शैक्षणिक दस्तावेजों में नाम अलग होने के कारण सरकारी नौकरी के आवेदन में उनकी उम्मीदवारी प्रभावित होने लगी। उन्होंने कॉलेज और विश्वविद्यालय से रिकॉर्ड सुधारने की मांग की।
कॉलेज ने आवेदन ठुकराया, हाईकोर्ट पहुंचीं
पहले हाईकोर्ट ने 3 नवंबर 2022 को उन्हें विस्तृत अभ्यावेदन देने और कॉलेज को नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद कॉलेज की गवर्निंग बॉडी ने 6 मार्च 2023 को नाम बदलने की मांग खारिज कर दी। इसके बाद सुरभि ने दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के फैसले को रद्द कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अविनाश के. मिश्रा ने पैरवी की।
केवल नियमों का हवाला देकर नहीं रोक सकते सुधार
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनाए रखना संस्थान की जिम्मेदारी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि प्रमाणिक दस्तावेजों और बाद में हुए कानूनी बदलावों के आधार पर नाम सुधारने की मांग को ठुकरा दिया जाए।
अदालत ने कहा कि परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद नाम सुधारने का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने को ही आवेदन खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के ‘जिज्ञासा यादव’ मामले में दिए गए सिद्धांतों के अनुसार रिकॉर्ड में सुधार किया जाना चाहिए।
पुराना रिकॉर्ड भी रहेगा सुरक्षित
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि मूल दस्तावेजों और पहचान का सत्यापन करने के बाद कॉलेज सुरभि यादव के नाम से संशोधित शैक्षणिक दस्तावेज जारी करे। इसके लिए जरूरत पड़ने पर शपथपत्र, निर्धारित फीस, राजपत्र में प्रकाशन या अन्य औपचारिकताएं पूरी कराई जा सकती हैं।
अदालत ने यह भी साफ किया कि नाम सुधारने से उनकी पढ़ाई, प्रवेश वर्ष, अंक, डिवीजन या शैक्षणिक योग्यता में कोई बदलाव नहीं होगा। कॉलेज पुराने रिकॉर्ड में यह उल्लेख रख सकता है कि संबंधित अवधि में उन्होंने सुहाना अंसारी नाम से पढ़ाई की थी। अटल विश्वविद्यालय को भी रिकॉर्ड सुधारने में जरूरत पड़ने पर सहयोग करना होगा।
हाईकोर्ट ने प्रमाणित आदेश मिलने के छह सप्ताह के भीतर पूरी प्रक्रिया करने का निर्देश दिया है।













