महाराष्ट्र की महिला बिचौलिया गिरफ्तार, भारतीय दूतावास की मदद से पीड़िता की हुई सुरक्षित वापसी; अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क की जांच

कोरबा। विदेश में अच्छी नौकरी और मोटी तनख्वाह का सपना दिखाकर एक महिला को अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह के हवाले कर दिया गया। महाराष्ट्र की एक महिला बिचौलिया उसे बैंकॉक में नौकरी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गई और वहां पहुंचते ही गिरोह को सौंपकर खुद लौट आई। इसके बाद पीड़िता को म्यांमार के एक साइबर ठगी केंद्र में बंधक बनाकर 17 महीने तक प्रताड़ित किया गया। उससे फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर लोगों से ठगी कराई जाती रही। भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप से उसकी रिहाई संभव हुई। अब कोरबा पुलिस ने इस मामले में महाराष्ट्र के गोंदिया निवासी 35 वर्षीय स्नेहा भथलाल बडोले को गिरफ्तार किया है।

सोशल मीडिया विज्ञापन से शुरू हुआ जाल

दर्री निवासी 36 वर्षीय महिला ने सोशल मीडिया पर बैंकॉक में ऑफिस असिस्टेंट की नौकरी का विज्ञापन देखा था। इसमें 30 हजार थाई बाट यानी करीब 86,211 रुपये मासिक वेतन देने का दावा किया गया था। विज्ञापन में दिए गए नंबर पर संपर्क करने के बाद उसकी बातचीत महाराष्ट्र निवासी स्नेहा बडोले से हुई।

अप्रैल 2025 में पीड़िता मुंबई पहुंची, जहां से स्नेहा उसे फ्लाइट से बैंकॉक ले गई। आरोप है कि बैंकॉक पहुंचने के बाद उसने पीड़िता को मानव तस्करी गिरोह के हवाले कर दिया और खुद भारत लौट आई।

पासपोर्ट छीनकर म्यांमार के KK Park में बनाया बंधक

बैंकॉक से अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सदस्य पीड़िता को सड़क मार्ग से म्यांमार के KK Park ले गए। वहां उसका पासपोर्ट छीन लिया गया और उसे बंधक बनाकर रखा गया। उसके साथ मारपीट और प्रताड़ना भी की गई।

गिरोह ने उसे फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाने और ऑनलाइन ट्रेडिंग व निवेश के नाम पर लोगों को ठगने के लिए मजबूर किया। इस तरह नौकरी के नाम पर विदेश पहुंची महिला खुद साइबर अपराध के एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का शिकार बन गई।

भारतीय दूतावास की मदद से हुई वापसी

पीड़िता को छुड़ाने के लिए भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय, संबंधित देश के स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने समन्वित प्रयास किए। इसके बाद 31 अगस्त 2026 को उसे सुरक्षित भारत वापस लाया गया। कोरबा पहुंचने पर उसे परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।

बिचौलिया गिरफ्तार, नेटवर्क की तलाश जारी

पीड़िता की शिकायत पर दर्री थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 143(2) और 146 के तहत अपराध दर्ज किया गया। जांच में स्नेहा बडोले की भूमिका सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार कर कोरबा लाया गया। कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस को उसकी रिमांड मिली है।

पुलिस अब यह पता लगा रही है कि पीड़िता को गिरोह के हवाले करने के बदले स्नेहा को कितनी रकम मिली थी। साथ ही इस नेटवर्क में शामिल दूसरे लोगों, उनके आर्थिक लेनदेन और अब तक ठगी का शिकार हुए अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

फर्जी पहचान के सहारे चल रहा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

मामले की निगरानी कर रहे दर्री CSP और प्रशिक्षु IPS अधिकारी विमल पाठक के मुताबिक, मानव तस्करी और साइबर ठगी में शामिल यह गिरोह संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के रूप में काम कर रहा है। शुरुआती जांच में गिरोह के सदस्यों से जुड़े पहचान दस्तावेज और मोबाइल नंबर फर्जी पाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि म्यांमार में सैन्य शासन और वहां के हालात के कारण लोगों को सीधे वहां नौकरी के लिए बुलाना मुश्किल है। इसलिए गिरोह पहले बैंकॉक में नौकरी का लालच देता है और फिर वहां से सड़क मार्ग के जरिए लोगों को म्यांमार पहुंचा देता है।

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here