चार अधिवक्ता और न्यायिक सेवा के दो अधिकारियों की नियुक्ति की सिफारिश; 22 स्वीकृत पदों में से छह नाम मंजूर होने पर भी दो पद रहेंगे खाली
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जजों की कमी दूर करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बड़ा कदम उठाया है। कॉलेजियम ने हाईकोर्ट में छह नए जजों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश की है। इनमें चार अधिवक्ता और न्यायिक सेवा के दो अधिकारी शामिल हैं। 30 अक्टूबर 2026 को हुई कॉलेजियम की बैठक में इन नामों पर सहमति बनी।
बार कोटे से चार अधिवक्ताओं के नाम
कॉलेजियम ने अधिवक्ता कोटे से आनंद शुक्ला, रत्न निधि पुष्टि (आर.एन. पुष्टि अथवा रतन पुष्टि), शशांक ठाकुर और सौरभ शर्मा के नामों की सिफारिश की है। इन चारों को हाईकोर्ट में जज नियुक्त करने का प्रस्ताव है।
न्यायिक सेवा से दो अधिकारियों पर भरोसा
न्यायिक सेवा कोटे से रजनीश श्रीवास्तव और बलराम प्रसाद वर्मा के नाम आगे बढ़ाए गए हैं। इस तरह छह नामों में चार अधिवक्ता और दो न्यायिक अधिकारी शामिल हैं। कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अंतिम नियुक्ति संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के बाद होगी।
22 स्वीकृत पद, छह नियुक्तियों के बाद भी दो खाली
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जजों के कुल 22 पद स्वीकृत हैं। सितंबर 2026 में तीन नए जजों की नियुक्ति के बाद कार्यरत जजों की संख्या 14 बताई गई थी। अब छह प्रस्तावित नियुक्तियां पूरी होने पर यह संख्या बढ़कर 20 हो सकती है। इसके बावजूद हाईकोर्ट में दो पद खाली रह जाएंगे।
सितंबर में नियुक्त किए गए तीन जजों में संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार शामिल हैं।
नियुक्तियों से मिलेगी राहत, लेकिन पूरी नहीं होगी कमी
हाईकोर्ट में जजों के खाली पद लंबे समय से न्यायिक कामकाज और लंबित मामलों के निपटारे के लिहाज से चुनौती बने हुए हैं। छह नए नामों की सिफारिश से निश्चित रूप से कार्यरत जजों की संख्या बढ़ेगी, लेकिन 22 स्वीकृत पदों के मुकाबले दो पद फिर भी रिक्त रहेंगे। ऐसे में हाईकोर्ट में जजों की पूरी संख्या सुनिश्चित करने के लिए आगे भी नियुक्तियों की जरूरत बनी रहेगी।














