कोरबा के साजापानी जंगल में 20 अक्टूबर को हुआ जन्म; वन विभाग ने सुरक्षा बढ़ाई
कोरबा। इंसान और हाथियों के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच कोरबा जिले के करतला विकासखंड से आपसी सहअस्तित्व की अनूठी पहल सामने आई है। सजापानी के जंगल में 20 अक्टूबर को एक मादा हाथी ने बच्चे को जन्म दिया। अब ग्रामीण इस नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में 25 अक्टूबर को छठी मनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए आसपास के सात गांवों के लोग एकजुट हो रहे हैं।
हर घर से 20 रुपये और आधा किलो चावल
जंगली हाथी के बच्चे के जन्म को ग्रामीण सामूहिक खुशी का अवसर मान रहे हैं। सजापानी की मां कांशीरानी नवयुवक सेवा समिति के समन्वय से छठी समारोह और सामूहिक भोज की तैयारी की जा रही है। आयोजन में सजापानी, जामपानी, पहाड़गांव, रामभांठा, लबेद, घुइचुआ और काशीपानी सहित आसपास के गांवों के लोगों की भागीदारी की बात कही गई है।
आयोजन के लिए प्रत्येक घर से 20 रुपये और आधा किलो चावल जुटाया जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि जंगल में हाथी के बच्चे का जन्म खुशी मनाने का अवसर है। इंसानी परिवारों में नवजात के जन्म पर छठी मनाने की परंपरा को वन्यजीव के बच्चे के साथ जोड़ने की यह पहल चर्चा में है।
पहले भी मनाया जा चुका है ऐसा उत्सव
क्षेत्र में इस तरह का आयोजन पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले सेंदरीपाली के ग्रामीण भी हाथी के बच्चे के जन्म पर इसी तरह का उत्सव मना चुके हैं। इस बार भी ग्रामीणों में आयोजन को लेकर उत्साह है। उनके मुताबिक, इलाके में मौजूद हाथियों ने अब तक ग्रामीणों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है।
मां हाथी के आक्रामक होने का खतरा
ग्रामीणों के उत्साह के बीच वन विभाग ने हाथियों की सुरक्षा और लोगों की सतर्कता को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। विभाग के अनुसार, मादा हाथी अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहती है। उसे किसी तरह का खतरा महसूस होने पर वह आक्रामक हो सकती है।
इसी वजह से आसपास के गांवों में मुनादी कराकर लोगों को जंगल की ओर नहीं जाने की सलाह दी जा रही है। हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और निगरानी के लिए ड्रोन की भी मदद ली जा रही है।
ग्रामीणों की यह पहल जहां वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देती है, वहीं वन विभाग की चेतावनी भी साफ है कि उत्सव के दौरान हाथियों और उनके बच्चे से सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है।














