शनिवार शाम 6:30 बजे लखीराम ऑडिटोरियम में होने वाले इस कार्यक्रम में पुराने हिंदी फिल्मी गीतों की मधुर प्रस्तुतियां होंगी। कार्यक्रम में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा।
‘लग जा गले’ से ‘एक प्यार का नगमा है’ तक का सफर
‘नॉस्टैल्जिया’ केवल पुराने फिल्मी गीतों की प्रस्तुति नहीं, बल्कि उन भावनाओं को दोबारा महसूस करने का प्रयास है, जो इन गीतों के साथ हमारी जिंदगी का हिस्सा बनीं। प्रेम, विरह, मिलन और रिश्तों की मिठास को समेटे ये गीत आज भी अलग-अलग पीढ़ियों को एक साथ जोड़ते हैं।
कार्यक्रम में ‘लग जा गले’, ‘अभी न जाओ छोड़कर’, ‘दिल ढूंढता है’, ‘एक प्यार का नगमा है’ और ‘रहे न रहे हम, महका करेंगे’ जैसे सदाबहार गीतों की यादें श्रोताओं को पुराने दौर की सैर करा सकती हैं।
इन गीतों की खासियत यह है कि हर श्रोता इनमें अपनी जिंदगी की कोई न कोई कहानी तलाश लेता है। किसी के लिए ये जवानी के दिनों की याद हैं तो किसी के लिए पहले प्यार या किसी बिछड़े अपने से जुड़ी भावनाओं का सहारा।
शास्त्रीय संगीत की साधना से सजेगी शाम
श्रुति प्रभला शास्त्रीय संगीत की प्रशिक्षित गायिका हैं। भजन और गजल गायन में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। सुरों की शुद्धता और भावपूर्ण गायकी उनकी प्रस्तुतियों की खासियत है। ‘नॉस्टैल्जिया’ में वह इसी संगीत साधना के साथ हिंदी सिनेमा के कालजयी गीतों को नए सिरे से श्रोताओं के सामने रखेंगी।
इस संगीतमय शाम में भोपाल के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वायलिन वादक मनोज कुमार, तबले पर शाहनवाज हुसैन, सिंथेसाइजर पर शाहिद मासूम और बिलासपुर के पीटर मुदलियार ऑक्टापैड पर संगत करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी हासिल कर चुकी हैं पहचान
बिलासपुर की श्रुति प्रभला ने संगीत के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। वह कोलकाता की संगीत रिसर्च अकादमी में गुरु उस्ताद वसीम अहमद खान की शिष्या हैं। उस्ताद वसीम अहमद खान आगरा घराने से जुड़े हैं। श्रुति ने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से संगीत में मास्टर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स की डिग्री हासिल की है।
श्रुति अंतरराष्ट्रीय गायन प्रतियोगिता ‘द वॉइस ऑफ वर्ल्ड’ की विजेता रह चुकी हैं। इस्कॉन नेल्लोर की अंतरराष्ट्रीय भजन प्रतियोगिता में उन्होंने प्रथम स्थान हासिल कर स्वर्ण पदक भी जीता। कबीर काव्य की प्रस्तुति के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पुरस्कार और स्वर्गीय माधवराव सप्रे स्मृति महोत्सव में ‘नव्य सम्मान’ से सम्मानित किया जा चुका है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्योत्सव सहित कई प्रतिष्ठित मंचों पर शास्त्रीय गायन किया है। इसके अलावा कबीर गायन, भजन और गजल के क्षेत्र में भी उनकी विशिष्ट पहचान है। वह एनटीपीसी सीपत का आधिकारिक गीत गा चुकी हैं और आकाशवाणी के लिए विशेष गजल प्रस्तुतियां भी दे चुकी हैं।
‘कुछ गीत केवल सुने नहीं, जिए जाते हैं’
श्रुति प्रभला के अनुसार, पुराने हिंदी फिल्मी गीतों से जुड़ी भावनाएं समय के साथ खत्म नहीं होतीं। उन्होंने कहा, “कुछ गीत केवल सुने नहीं जाते, बल्कि जिए जाते हैं। कोई धुन हमें बचपन में ले जाती है तो कोई भूले-बिसरे रिश्तों और जिंदगी के खूबसूरत पलों की याद दिलाती है। मेरे लिए ‘नॉस्टैल्जिया’ पुराने गीत गाने का कार्यक्रम भर नहीं, बल्कि उन भावनाओं को फिर से जीने की कोशिश है, जो इन गीतों के साथ हमारे भीतर आज भी जीवित हैं।”
उन्होंने कहा कि महान गीत कभी पुराने नहीं होते। समय बदलता है और पीढ़ियां आगे बढ़ती हैं, लेकिन सच्चे संगीत का जादू कायम रहता है। उनकी कोशिश है कि कार्यक्रम से लौटते समय श्रोता अपने साथ गीतों की धुनों के अलावा खूबसूरत यादें, अनकहे एहसास और चेहरे पर हल्की मुस्कान भी लेकर जाएं।
संगीत और यादों के नाम होगी शाम
‘बावरा मन’ और ‘श्लोक-ध्वनि फाउंडेशन’ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के संगीत प्रेमियों, परिवारों, युवाओं और पुराने हिंदी फिल्मी गीतों के शौकीनों को आमंत्रित किया गया है। आयोजकों का उद्देश्य सदाबहार गीतों के जरिए भारतीय संगीत की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और श्रोताओं को यादों से जुड़ी एक भावपूर्ण संगीतमय शाम का अनुभव कराना है।
कार्यक्रम: नॉस्टैल्जिया
तारीख: 24 अक्टूबर 2026, शनिवार
समय: शाम 6:30 बजे
स्थान: लखीराम ऑडिटोरियम, बिलासपुर
प्रवेश: निःशुल्क













