राज्य सरकार का दावा- एयरपोर्ट ATR विमानों के संचालन के लिए 3C श्रेणी में उपयुक्त, 4C में अपग्रेड करने को तैयार; याचिकाकर्ताओं ने रनवे की लंबाई पर उठाए सवाल

बिलासपुर। बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार और हवाई सुविधाओं को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से ठोस कार्रवाई की जानकारी मांगी है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी देनी होगी।

बेंच ने AAI को भी एयरपोर्ट के प्रबंधन, संचालन और विकास की जिम्मेदारी लेने के संबंध में उठाए गए कदमों का ताजा ब्योरा देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

पत्राचार में उलझा एयरपोर्ट का भविष्य

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील सीनियर एडवोकेट आशीष श्रीवास्तव और अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि AAI की ओर से फिर किसी वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी के बजाय जूनियर अधिकारी का हलफनामा पेश किया गया है, जबकि पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिकारी से जानकारी मांगी थी।

दस्तावेजों से पता चला कि राज्य सरकार बिलासपुर के साथ अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट को भी AAI को सौंपने पर विचार कर रही है। लेकिन AAI ने स्पष्ट सहमति या समयसीमा बताने के बजाय राज्य सरकार से जमीन, कुल क्षेत्रफल, खसरा-वार विवरण, मालिकाना हक और मौजूदा सुविधाओं की जानकारी मांगी है।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस तरह का पत्राचार एयरपोर्ट के हस्तांतरण को लेकर किसी समयबद्ध योजना की उम्मीद नहीं जगाता। चीफ जस्टिस ने भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच केवल चिट्ठियां भेजने में समय बर्बाद नहीं होना चाहिए। दोनों पक्षों से ठोस कदमों की अपेक्षा है।

3C श्रेणी पर भी सवाल, गर्मियों में घटानी पड़ती है यात्री क्षमता

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने बताया कि बिलासपुर एयरपोर्ट फिलहाल 3C श्रेणी के तहत ATR विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है और सरकार इसे 4C श्रेणी में अपग्रेड करने को तैयार है।

इस पर याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि एयरपोर्ट मौजूदा मानकों पर भी पूरी तरह खरा नहीं उतरता। रनवे की लंबाई 1,495 मीटर होने के कारण गर्मियों में ATR विमान में सभी 72 यात्रियों को बैठाकर उड़ान भरना संभव नहीं हो पाता और क्षमता घटाकर करीब 52 यात्रियों तक करनी पड़ती है। उनका कहना था कि यही वजह है कि निजी एयरलाइंस यहां से परिचालन शुरू नहीं कर पा रही हैं।

तुलना में अंबिकापुर एयरपोर्ट का रनवे 1,900 मीटर और जगदलपुर का 1,707 मीटर लंबा बताया गया। याचिकाकर्ताओं ने रनवे विस्तार की जरूरत पर जोर दिया।

104 करोड़ के काम पर असमंजस

सुनवाई में बताया गया कि रनवे विस्तार के लिए 63 करोड़ रुपये और नए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर के लिए 41 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मंत्रालय को भेजे गए हैं। लेकिन काम इसलिए अटका है क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि विकास कार्य AAI कराएगा या राज्य सरकार।

हाईकोर्ट ने राज्य के विमानन विभाग के सचिव को तीन सप्ताह में 4C श्रेणी में अपग्रेड करने की दिशा में उठाए गए कदमों का विस्तृत हलफनामा देने को कहा है। AAI को भी इसी अवधि में ताजा जानकारी पेश करनी होगी।

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