एक साल पुराने मामले में अब हुई कार्रवाई; कक्षा 9 से 11 की अन्य छात्राओं ने भी लगाए गंभीर आरोप
बीजापुर (बस्तर)। बीजापुर जिले के भोपालपटनम थाना क्षेत्र स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में 14 वर्षीय छात्रा के साथ शिक्षक द्वारा कथित यौन दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। छात्रा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ शनिवार को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी की उम्र करीब 40 वर्ष बताई गई है और उसकी तलाश की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक छात्रा ने आरोप लगाया है कि शिक्षक ने पिछले वर्ष अक्टूबर में उसके साथ अनुचित व्यवहार करते हुए उसे गलत तरीके से छुआ था। इसके बाद भी कई मौकों पर उसके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया।
अन्य छात्राओं ने भी लगाए आरोप
मामले की जांच के दौरान कक्षा 9वीं से 11वीं तक की कुछ अन्य छात्राओं ने भी आरोपी शिक्षक पर अनुचित तरीके से छूने और दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं। पुलिस अब इन छात्राओं के बयान भी दर्ज कर रही है।
बीजापुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमन कुमार झा ने बताया कि शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 सहित अन्य संबंधित धाराओं और पॉक्सो एक्ट, 2012 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी होगी जांच
पुलिस के अनुसार कुछ छात्राओं के अभिभावकों ने बताया कि मामले की जानकारी हाल ही में स्कूल की प्राचार्य तक पहुंची थी। ऐसे में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि शिकायत सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई कार्रवाई की गई थी या नहीं।
मामले में आरोपी शिक्षक की भूमिका के साथ-साथ शिकायत मिलने के बाद संस्थान के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों की भी जांच की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने दिए सख्त जांच और कार्रवाई के निर्देश
मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीजापुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्तर पर शिकायत को नजरअंदाज करने, मामले को दबाने या कर्तव्य में लापरवाही की बात सामने आती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
सभी आवासीय संस्थानों में बढ़ाई जाएगी निगरानी
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिलों में बालिकाओं के छात्रावास, आश्रम और आवासीय विद्यालयों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इन संस्थानों में नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के साथ सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया की समीक्षा करने को कहा है।
कलेक्टरों को छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में वार्डन तथा अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति, परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और शिकायत निवारण तंत्र की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिकायत का इंतजार नहीं, नियमित निगरानी पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था केवल शिकायत सामने आने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। नियमित निरीक्षण, बच्चों से लगातार संवाद और प्रभावी निगरानी के जरिए ऐसी घटनाओं को पहले ही रोकने की कोशिश जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और गरिमा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता। दुर्व्यवहार, उत्पीड़न या असुरक्षित माहौल से संबंधित शिकायतों पर संवेदनशीलता के साथ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवासीय विद्यालय और छात्रावास बच्चों के लिए केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि उनका घर भी हैं। अभिभावक भरोसे के साथ अपने बच्चों को इन संस्थानों में भेजते हैं और इस भरोसे की रक्षा करना वहां काम करने वाले प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने निर्देश दिया कि बालिकाओं से दुर्व्यवहार, उत्पीड़न या धमकी से जुड़ी शिकायत मिलने पर संबंधित विभाग और पुलिस तत्काल समन्वय के साथ कार्रवाई करें। जरूरत पड़ने पर पीड़ित छात्राओं को काउंसलिंग और अन्य आवश्यक सहायता भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।













