24 घंटे चालू रहेगा बहुभाषी कॉल सेंटर, मोबाइल वैन से दूरस्थ गांवों में मिलेंगी सुविधाएं; 198 आश्रमों और आवासीय स्कूलों की डिजिटल निगरानी भी होगी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ आदिवासी इलाकों तक सरकारी योजनाओं और जरूरी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की सुकमा जिला प्रशासन की पहल ‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ को राष्ट्रीय स्तर पर चुना गया है। भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग ने देशभर से चुने गए 14 प्रस्तावों में इसे शामिल करते हुए 1.17 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।
इस पहल का मकसद साफ है—दूरस्थ जंगलों में रहने वाले लोगों को छोटे-छोटे सरकारी कामों के लिए बार-बार लंबी दूरी तय न करनी पड़े। इसके लिए 24 घंटे चलने वाला बहुभाषी कॉल सेंटर और मोबाइल सर्विस वैन शुरू की जाएंगी। यह पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान की भावना के अनुरूप है।
40 हजार से ज्यादा फोन कॉल, हजारों लोगों को मिला लाभ
सुकमा में मार्च 2026 से संचालित सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग एंड कंट्रोल सेंटर (CMCC 1.0) के जरिए अब तक 40 हजार से अधिक फोन कॉल किए जा चुके हैं। इस व्यवस्था के तहत सरकारी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने के साथ विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों से संपर्क भी किया गया है।
प्रशासन के मुताबिक, इस दौरान 10,078 आयुष्मान कार्ड और 11,103 नए वोटर आईडी कार्ड जारी किए गए। इसके अलावा 5,788 लोगों का आधार एनरोलमेंट और 27,391 बायोमेट्रिक अपडेट किए गए।
आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए 452 महिला स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया है, जिनसे 4,745 परिवारों को रोजगार और आजीविका से जुड़ने में मदद मिली है।
स्थानीय बोलियों में मिलेगी मदद, गांवों तक जाएंगी मोबाइल वैन
‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ के तहत चौबीसों घंटे काम करने वाला बहुभाषी कॉल सेंटर बनाया जाएगा। यहां स्थानीय बोलियों में भी लोगों की समस्याएं सुनी जाएंगी और उन्हें जरूरी सेवाओं की जानकारी व सहायता मिलेगी।
दो मोबाइल सर्विस वैन दूरस्थ गांवों तक पहुंचेंगी। इनके जरिए आधार से जुड़ी सुविधाओं सहित दूसरी नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इससे अंदरूनी इलाकों के ग्रामीणों को जरूरी कामों के लिए बार-बार जिला मुख्यालय या दूसरे सरकारी केंद्रों तक जाने की परेशानी से राहत मिल सकती है।
हालांकि, इस पहल की असली कामयाबी इस बात से तय होगी कि मोबाइल वैन नियमित रूप से कितने गांवों तक पहुंचती हैं और लोगों की शिकायतों का समाधान कितनी तेजी से होता है।
198 आश्रमों और आवासीय स्कूलों पर डिजिटल निगरानी
इस परियोजना में शिक्षा व्यवस्था को भी शामिल किया गया है। जिले के 198 आश्रमों और आवासीय स्कूलों में डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जाएगा। इससे स्कूलों में उपस्थिति की निगरानी मजबूत करने में मदद मिलेगी।
स्कूल से बाहर रह गए बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए भी एक विशेष सिस्टम तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य उन बच्चों तक पहुंचना है, जो किसी कारण से पढ़ाई छोड़ चुके हैं या स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
कलेक्टर स्तर पर बनेगा डिजिटल डैशबोर्ड
सरकारी योजनाओं, नागरिक सेवाओं और शिक्षा संबंधी गतिविधियों की एक साथ निगरानी के लिए कलेक्टर स्तर पर डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा। इससे अलग-अलग विभागों की जानकारी एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी और योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर नजर रखना आसान होगा।
कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में CMCC 1.0 मार्च 2026 से काम कर रहा है। अब इसके अगले चरण के जरिए तकनीक और प्रशासनिक तालमेल को सुकमा के दूरस्थ आदिवासी इलाकों तक ले जाने की तैयारी है।
राष्ट्रीय स्तर पर चयन और बजट की मंजूरी इस पहल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लेकिन अंतिम कसौटी यही होगी कि जंगलों के बीच बसे गांवों में रहने वाले लोगों को सरकारी सेवाएं वास्तव में उनके घर के करीब, समय पर और बिना अनावश्यक भागदौड़ के मिल पाती हैं या नहीं।














