रेलवे मुख्यालय में धूल खा रहा प्रस्ताव, यात्रियों की परेशानी दूर करने के लिए 9 अप्रैल को भेजी गई थी सिफारिश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ से बिहार के गया तक नियमित ट्रेन चलाने की मांग पर मुख्यमंत्री की पहल भी अब तक असर नहीं दिखा सकी है। मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देश पर रेलवे के रायपुर मंडल ने दुर्ग-गया के बीच नई नियमित ट्रेन चलाने का प्रस्ताव 9 अप्रैल 2026 को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर मुख्यालय भेजा था। छह महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद अधर में लटकी हुई है।

मुख्यमंत्री सचिवालय से रेलवे मुख्यालय तक पहुंची मांग

बिलासपुर के मोपका स्थित न्यू सिटी पार्क कॉलोनी निवासी जनार्दन प्रसाद पाल ने 9 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर दुर्ग से गया के बीच नियमित ट्रेन चलाने की मांग की थी। पाल एनटीपीसी में सुरक्षा विभाग के महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हैं।

मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस मांग पर कार्रवाई करते हुए उप सचिव मुकेश कुमार गोंड के माध्यम से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक को जरूरी कदम उठाने के लिए पत्र भेजा। इसके बाद रायपुर मंडल के मंडल वाणिज्य प्रबंधक राकेश सिंह ने यात्रियों की जरूरत को देखते हुए नई ट्रेन चलाने का प्रस्ताव तैयार कर 9 अप्रैल को बिलासपुर मुख्यालय भेज दिया।

लेकिन प्रस्ताव आगे बढ़ने के बजाय वहीं अटक गया। अब तक ट्रेन शुरू करने की दिशा में कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।

मौजूदा ट्रेन में भारी भीड़, लंबी वेटिंग से परेशानी

रेलवे के रायपुर मंडल की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में दुर्ग और गया के बीच यात्रियों की बढ़ती संख्या का उल्लेख किया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक, इस रूट पर चलने वाली ट्रेनों में खासकर एलटीटी-गया सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22357) में भारी भीड़ रहती है। लंबी वेटिंग लिस्ट के कारण यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है।

ऐसे में यात्रियों को यात्रा टालने या दूसरे महंगे साधनों का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि मौजूदा ट्रेनों की संख्या यात्रियों की मांग के मुकाबले पर्याप्त नहीं है।

धार्मिक यात्रा और पर्यटन के लिए भी जरूरी है ट्रेन

गया देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां पितरों के अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म के लिए छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में लोग जाते हैं। इसके अलावा गया के निकट बोधगया अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थस्थल होने के कारण सालभर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है।

छत्तीसगढ़ और बिहार के बीच रोजगार, पढ़ाई और पारिवारिक कारणों से भी बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं। इसके बावजूद दुर्ग से गया के लिए सीमित रेल सुविधा यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है।

प्रयागराज होकर चले सीधी ट्रेन

जनार्दन प्रसाद पाल ने मांग की है कि दुर्ग से प्रयागराज जंक्शन होकर गया तक नियमित सीधी ट्रेन शुरू की जाए। इससे यात्रियों को सुविधाजनक विकल्प मिलेगा और मौजूदा ट्रेनों पर दबाव भी कम होगा। साथ ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

अब रेलवे मुख्यालय की जवाबदेही

रायपुर मंडल ने यात्रियों की मांग और ट्रेनों में भीड़ का हवाला देते हुए प्रस्ताव भेज दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मुख्यमंत्री सचिवालय से पहल हुई और रेलवे के मंडल स्तर पर भी सिफारिश भेजी गई, तो बिलासपुर मुख्यालय में इस पर अब तक फैसला क्यों नहीं हुआ?

यात्रियों की जरूरत से जुड़ा प्रस्ताव महीनों तक लंबित रहना रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब जरूरत है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय इस प्रस्ताव पर जल्द निर्णय ले और दुर्ग-गया के बीच नियमित ट्रेन शुरू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

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