पड़ोसी राज्यों की पुलिस से संपर्क और गिरफ्तारी के प्रयासों का ब्योरा नहीं देने पर किए सवाल
बिलासपुर। पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद फरार हुए 32 कैदियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने क्या ठोस कदम उठाए हैं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इसकी विस्तृत जानकारी मांगी है। स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने फरार सभी 32 कैदियों की मौजूदा स्थिति, उनके ठिकानों और पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ हुए पत्राचार का विवरण मांगा है।
पहले 36 कैदी थे फरार, दोबारा गिरफ्तारी के बाद संख्या घटी
मामले में पहले पेश किए गए शपथपत्र के अनुसार, अप्रैल में एक कैदी की गिरफ्तारी के बाद भी 36 कैदी फरार थे। जुलाई में सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि दो और कैदियों को पकड़कर जेल भेज दिया गया है। इसके बाद फरार कैदियों की संख्या घटकर 34 रह गई थी।
पुलिस ने विशेष टीमें गठित करने, कैदियों के पुराने पतों और संभावित ठिकानों की जांच करने तथा मुखबिरों से जानकारी जुटाने जैसे कदमों की जानकारी दी थी।
पड़ोसी राज्यों से समन्वय पर स्पष्ट जानकारी नहीं
27 अक्टूबर को पेश किए गए नए शपथपत्र में बताया गया कि 25 अक्टूबर 2025 तक दो और कैदियों को पकड़ा जा चुका था और 32 अब भी फरार हैं। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि अधिकांश फरार कैदी पड़ोसी राज्यों के रहने वाले हैं।
इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि फरार कैदी पड़ोसी राज्यों में छिपे हो सकते हैं तो वहां उनकी गिरफ्तारी के लिए क्या कदम उठाए गए? शपथपत्र में न तो संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय का स्पष्ट ब्योरा था और न ही सभी 32 कैदियों की मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी।
गिरफ्तारी के प्रयासों का पूरा ब्योरा देना होगा
हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया कि तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथपत्र पेश किया जाए। इसमें सभी फरार कैदियों की स्थिति और पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ हुए पत्राचार की प्रतियां भी शामिल हों।
मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर 2026 को होगी।













