सिर्फ पांच हजार रुपये में खरीदा गया था डेटा, निजी जानकारी लीक, साइबर ठगी के एंगल से भी जांच
बिलासपुर। बिलासपुर में निजी मोबाइल डेटा की कथित खरीद-फरोख्त और लोन दिलाने के नाम पर लोगों से संपर्क करने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। मामले की जांच तब शुरू हुई जब लोन ऑफर से जुड़ा एक कॉल स्वयं बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग तक पहुंच गया। इसे गंभीरता से लेते हुए उन्होंने तत्काल जांच के निर्देश दिए और पूरी कार्रवाई की स्वयं निगरानी की। इसके बाद सिविल लाइन पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने ट्रस्ट फाइनेंशियल सर्विसेस की संचालिका उषा कश्यप, अमन राठौर और शेख जुनैद खान के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 62, 3(5) तथा आईटी एक्ट की धारा 72(ए) के तहत अपराध दर्ज किया है।
सिविल लाइन थाना प्रभारी किशोर कुमार केवट ने बताया कि 22 जून को पुलिस लाइन निवासी रविकांत दुबे ने लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अग्रसेन चौक स्थित सुपर मार्केट से संचालित ट्रस्ट फाइनेंशियल सर्विसेस के कर्मचारी अवैध रूप से प्राप्त मोबाइल नंबरों पर कॉल कर पर्सनल, होम, बिजनेस और वाहन लोन दिलाने का झांसा दे रहे हैं।
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों के पास करीब एक लाख लोगों का मोबाइल डेटा मौजूद था। पूछताछ में उषा कश्यप ने बताया कि उसने यह पूरा डेटाबेस अमन राठौर से मात्र पांच हजार रुपये में खरीदा था। इसके बाद अमन राठौर से पूछताछ की गई तो उसने खुलासा किया कि यह डेटा उसे शेख जुनैद खान उपलब्ध कराता था।
पुलिस के अनुसार शेख जुनैद खान खुद को रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़ा बताकर घर-घर जाता था और लोगों से बातचीत के दौरान उनके मोबाइल नंबर तथा अन्य जानकारियां एकत्र करता था। इसके अलावा सरकारी विभागों, ऑनलाइन डायरेक्टरी और अन्य स्रोतों से भी मोबाइल नंबर जुटाए जाते थे। बाद में इन जानकारियों का डेटाबेस तैयार कर बेचा जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि लोगों के मोबाइल नंबर, नाम और पते जैसी व्यक्तिगत जानकारियों का उनकी अनुमति के बिना व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन आंकड़ों का इस्तेमाल केवल लोन संबंधी कॉल के लिए किया गया या फिर साइबर ठगी के अन्य मामलों में भी इनका उपयोग हुआ।
पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस तरह का डेटा छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों या दूसरे राज्यों में भी बेचा गया। आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
आईजी रामगोपाल गर्ग ने कहा कि यदि जांच में व्यक्तिगत जानकारी की चोरी, अवैध बिक्री या किसी संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है तो सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपना मोबाइल नंबर, आधार, पैन, बैंक खाते की जानकारी या ओटीपी किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था के साथ साझा न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।














