नौ सितंबर को होगी अगली सुनवाई, पेंड्रीडीह-नेहरू चौक सड़क और फुटओवर ब्रिज परियोजनाओं की प्रगति भी बताई गई

बिलासपुर। प्रदेश की जर्जर सड़कों, सड़क सुरक्षा और राजमार्गों पर घूम रहे आवारा मवेशियों के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सड़क सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों और आवारा मवेशियों की समस्या के स्थायी समाधान पर नया शपथपत्र अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।

हाईकोर्ट राज्यभर की सड़कों की खराब स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई कर रहा है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने विभिन्न विभागों के शपथपत्र और कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट का परीक्षण करते हुए मामले की लगातार निगरानी जारी रखने का निर्णय लिया था।

सरकार की ओर से दायर हलफनामे में बताया गया कि आवारा मवेशियों के लिए शेड बनाए जा रहे हैं। निर्माण पूरा होने के बाद इनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

पेंड्रीडीह-नेहरू चौक सड़क के पुनर्निर्माण की तैयारी

सुनवाई के दौरान बताया गया कि रायपुर रोड स्थित पेंड्रीडीह से नेहरू चौक तक सड़क के पुनर्निर्माण के लिए एनआईटी रायपुर की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

तुर्काडीह, सेंदरी और बेलतरा में बनेंगे फुटओवर ब्रिज

लोक निर्माण विभाग ने अदालत को बताया कि तुर्काडीह, सेंदरी, रानीगांव, मलनाडीह और बेलतरा में पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए फुटओवर ब्रिज बनाए जा रहे हैं। परियोजना की अनुमानित लागत 17.95 करोड़ रुपये से घटाकर 11.38 करोड़ रुपये कर दी गई है। संयुक्त निरीक्षण पूरा हो चुका है और निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण शुरू होगा।

केवल रंगाई-पुताई नहीं, सड़क का पुनर्निर्माण जरूरी

हाईकोर्ट ने पहले भी रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग तथा पेंड्रीडीह बाइपास से नेहरू चौक तक सड़क की खराब हालत पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि सड़क किनारे सफाई या रंगाई-पुताई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि क्षतिग्रस्त सड़क का वास्तविक पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए।

फील्ड अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश

राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि हाईकोर्ट के निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन किया जा रहा है। परियोजना क्षेत्रों की नियमित निगरानी की जा रही है और संबंधित फील्ड इकाइयों को हर समय सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी कमी को तुरंत दूर कर आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


 

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