महिला वार्डन को हाईकोर्ट ने दी राहत, प्रशासनिक कमी को नहीं माना कानूनी आधार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को कानून के तहत मिलने वाले सेवा लाभ केवल प्रशासनिक कठिनाइयों या कर्मचारियों की कमी का हवाला देकर नहीं छीने जा सकते। अदालत ने बिलासपुर केंद्रीय जेल में पदस्थ एक महिला वार्डन की 60 दिन की अतिरिक्त चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) खारिज करने के आदेश को निरस्त करते हुए उसे अवकाश मंजूर करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता महिला वार्डन ने अपनी चाइल्ड केयर लीव बढ़ाने का आवेदन अस्वीकार किए जाने को चुनौती दी थी।
याचिका के अनुसार, महिला वार्डन ने 10 सितंबर 2025 को जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। उन्हें 13 अप्रैल 2026 से 11 जुलाई 2026 तक चाइल्ड केयर लीव स्वीकृत हुई थी। इसके बाद उन्होंने बच्चों की कम उम्र और उनकी निरंतर मातृ देखभाल की आवश्यकता का हवाला देते हुए 60 दिन की अतिरिक्त छुट्टी मांगी। हालांकि, जेल प्रशासन ने केवल महिला वार्डनों की कमी का कारण बताते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया।
राज्य शासन ने अदालत में दलील दी कि केंद्रीय जेल में स्टाफ की कमी और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के कारण अवकाश बढ़ाना संभव नहीं था। न्यायालय में प्रस्तुत शपथपत्र में बताया गया कि वार्डनों के 106 स्वीकृत पदों में से केवल 82 पद भरे हुए हैं और बिलासपुर केंद्रीय जेल में मात्र 13 महिला वार्डन कार्यरत हैं।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य ने कभी यह नहीं कहा कि याचिकाकर्ता छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 के नियम 38-सी के तहत चाइल्ड केयर लीव की पात्र नहीं थीं या उन्होंने 730 दिन की अधिकतम सीमा पूरी कर ली थी। अदालत ने कहा कि आवेदन अस्वीकार करने का एकमात्र आधार महिला वार्डनों की कमी था।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि रिक्त पदों या कर्मचारियों की कमी से प्रशासनिक कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं, लेकिन इन कारणों से किसी कर्मचारी को कानूनन प्राप्त वैधानिक सेवा लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। सेवा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उचित प्रशासनिक व्यवस्था करना नियोक्ता की जिम्मेदारी है, न कि कर्मचारी के अधिकारों में कटौती करना।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि चाइल्ड केयर लीव का उद्देश्य विशेष रूप से छोटे बच्चों की माताओं को उनके शुरुआती विकास के महत्वपूर्ण वर्षों में उचित देखभाल, सुरक्षा और आवश्यक समय उपलब्ध कराना है।
हाईकोर्ट ने महिला वार्डन की छुट्टी अस्वीकार करने के आदेश को मनमाना और विधि विरुद्ध बताते हुए निरस्त कर दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को आवेदन की तिथि से 60 दिन की चाइल्ड केयर लीव स्वीकृत की जाए तथा बीच की अनुपस्थिति अवधि को भी, जहां लागू हो, चाइल्ड केयर लीव माना जाए।














