नई दिल्ली। नए मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बुधवार को इसमें किए गए एक अहम बदलाव को वापस ले लिया। जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां ECINET के ऑनलाइन फॉर्म-6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा हटा दी गई है। अब ऐसे क्षेत्रों में नए मतदाताओं को निर्धारित वैधानिक फॉर्म-6 के जरिए ही आवेदन करना होगा।
हालांकि, जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR अभी चल रहा है, वहां यह अतिरिक्त घोषणा फिलहाल जारी रहेगी। यानी बदलाव पूरे देश में एक साथ लागू नहीं हुआ है, बल्कि SIR की स्थिति के आधार पर किया गया है।
पहले क्या जानकारी मांगी जा रही थी
फॉर्म-6 नए मतदाता के रूप में मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए निर्धारित वैधानिक आवेदन है। इसमें आवेदक से उसकी व्यक्तिगत जानकारी, जन्मतिथि या आयु, पता और अन्य निर्धारित विवरण मांगे जाते हैं।
SIR के दौरान ECINET पर ऑनलाइन फॉर्म-6 में इसके अतिरिक्त एक घोषणा जोड़ी गई थी। इसमें आवेदक से पूछा जा रहा था कि क्या उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार मतदाता सूची में दर्ज था। यदि नाम दर्ज होने की बात कही जाती थी तो संबंधित विधानसभा क्षेत्र, बूथ और क्रम संख्या की जानकारी भी मांगी जाती थी।
विवाद किस बात पर हुआ
इस अतिरिक्त जानकारी को लेकर चुनाव आयोग के भीतर ही आपत्तियां सामने आई थीं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में इस घोषणा को शामिल किए जाने पर सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव के लिए Registration of Electors Rules, 1960 में निर्धारित प्रक्रिया के तहत संशोधन जरूरी होगा।
इसके बाद चुनाव आयोग ने 24 सितंबर को स्पष्ट किया था कि मूल फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार, SIR के दौरान फॉर्म-6 के साथ अलग से Annexure-D यानी अतिरिक्त घोषणा-पत्र भरने की व्यवस्था की गई थी। आयोग ने 24 जून 2025 के SIR निर्देश का हवाला देते हुए कहा था कि नए मतदाताओं के आवेदन के साथ यह अतिरिक्त घोषणा ली जानी थी।
इस तरह विवाद का एक प्रमुख बिंदु यह था कि ऑनलाइन प्रक्रिया में अतिरिक्त घोषणा किस तरह शामिल की गई और क्या इसे वैधानिक फॉर्म में बदलाव माना जाए।
26 सितंबर को आयोग ने लिया था फैसला
चुनाव आयोग की 26 सितंबर की बैठक में इस व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय हुआ। आयोग की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस नोट में कहा गया कि SIR के दौरान फॉर्म-6 के साथ जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है, लेकिन गैर-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे।
आयोग ने यह भी बताया था कि उस समय तक 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका था। इन क्षेत्रों में SIR के दौरान छूट गए लोगों और नए मतदाताओं को मतदाता सूची के निरंतर अद्यतन की प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने का अवसर दिया जाना है।
अब क्या बदला
30 सितंबर को ECINET पोर्टल पर इस निर्णय को लागू कर दिया गया। SIR पूरा हो चुके राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ऑनलाइन फॉर्म-6 के बीच में जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा अब दिखाई नहीं दे रही है। संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइटों पर भी इसे हटाया गया है।
इसका सीधा अर्थ है कि ऐसे राज्यों में पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं से अब आवेदन के दौरान उनके माता-पिता या दादा-दादी के पुराने SIR रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी नहीं मांगी जाएगी। उन्हें निर्धारित फॉर्म-6 के जरिए सामान्य पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
SIR वाले राज्यों में व्यवस्था जारी
जहां SIR की प्रक्रिया अभी जारी है, वहां अतिरिक्त घोषणा को हटाया नहीं गया है। यानी उस दौरान नए मतदाता के आवेदन के साथ पुराने SIR रिकॉर्ड से संबंध की जानकारी वाली घोषणा लागू रहेगी।
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर के अपने आधिकारिक बयान में इसी आधार पर गैर-SIR अवधि और SIR अवधि के लिए अलग-अलग व्यवस्था स्पष्ट की थी।
विवाद की पृष्ठभूमि में आया बदलाव
फॉर्म-6 का यह विवाद ऐसे समय सामने आया जब SIR को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर राजनीतिक और कानूनी बहस चल रही है। अतिरिक्त घोषणा में माता-पिता और दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगे जाने को लेकर सवाल उठे थे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इसे मूल फॉर्म-6 में संशोधन के बजाय SIR के दौरान उससे जुड़े अतिरिक्त घोषणा-पत्र के रूप में स्पष्ट किया था।
30 सितंबर का फैसला फिलहाल उन क्षेत्रों तक सीमित है जहां SIR पूरा हो चुका है। इसलिए इसे फॉर्म-6 में देशव्यापी बदलाव के रूप में देखना सही नहीं होगा। मूल वैधानिक फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया गया है; SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को गैर-SIR अवधि में हटाया गया है।













