AAI को संचालन सौंपने का समर्थन, लेकिन नागपुर मॉडल पर 50-50 संयुक्त उपक्रम बनाने की दी सलाह

बिलासपुर। बिलासा एयरपोर्ट के प्रबंधन, संचालन और विकास का जिम्मा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को सौंपने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की है। समिति ने कहा कि एयरपोर्ट के तेज विकास और उच्च गुणवत्ता वाले संचालन के लिए एएआई का अनुभव उपयोगी है, लेकिन राज्य सरकार को एयरपोर्ट की जमीन और मौजूदा परिसंपत्तियों पर अपना मालिकाना अधिकार नहीं छोड़ना चाहिए।

समिति ने सुझाव दिया है कि बिलासपुर एयरपोर्ट के लिए महाराष्ट्र के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नागपुर की तर्ज पर संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) मॉडल अपनाया जाए। इस मॉडल में महाराष्ट्र सरकार और एएआई की 50-50 प्रतिशत भागीदारी है, जबकि एयरपोर्ट की संपत्तियों पर राज्य सरकार का स्वामित्व बरकरार है।

समिति का कहना है कि इसी प्रकार छत्तीसगढ़ सरकार और एएआई के बीच 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी वाला संयुक्त उपक्रम बनाकर एयरपोर्ट के प्रबंधन, संचालन और विकास की जिम्मेदारी उसे सौंपी जाए। इससे एयरपोर्ट का विकास भी तेज होगा और राज्य सरकार के स्वामित्व अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे।

समिति ने यह भी कहा कि बिलासपुर एयरपोर्ट के लिए राज्य सरकार पहले ही लगभग 400 एकड़ भूमि उपलब्ध करा चुकी है। इसके अलावा 290 एकड़ अतिरिक्त भूमि और एयरपोर्ट का मौजूदा बुनियादी ढांचा भी राज्य सरकार की ओर से विकसित किया गया है। ऐसे में करीब 700 एकड़ भूमि और तैयार परिसंपत्तियां बिना किसी प्रतिफल के एएआई को सौंपना राज्य के हित में नहीं होगा।

समिति ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि और आधारभूत संरचना के मूल्य के बराबर निवेश एएआई से कराया जाए। इससे दोनों पक्षों की भागीदारी संतुलित रहेगी और एयरपोर्ट के विस्तार के लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध होंगे।

समिति ने आशंका जताई कि यदि राज्य सरकार एयरपोर्ट पर अपना पूर्ण स्वामित्व छोड़ देती है, तो भविष्य में एएआई इसके निजीकरण का निर्णय ले सकता है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार का एयरपोर्ट पर कोई अधिकार या राजस्व हिस्सा नहीं रहेगा। इसलिए विकास और राज्यहित, दोनों को ध्यान में रखते हुए संयुक्त उपक्रम का मॉडल अपनाना अधिक उपयुक्त होगा।

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