महाराष्ट्र के खंडाला में होटल से सात आरोपी गिरफ्तार, 4 करोड़ से ज्यादा नकद और नकली नोटों जैसे काले कागज बरामद; छह राज्यों में 100 से अधिक लोगों को ठगने का आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस ने ऐसे अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों को काले और खराब नोटों को केमिकल की मदद से नए नोटों में बदलने और रकम दोगुनी करने का झांसा देकर करोड़ों रुपये ठगता था। पुलिस ने महाराष्ट्र के पुणे जिले के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में दबिश देकर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के साथ अब तक इस मामले में कुल नौ आरोपी पकड़े जा चुके हैं।

पुलिस के अनुसार, गिरोह वर्ष 2005 से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों में लोगों को अपना शिकार बना रहा था। अब तक 100 से अधिक लोगों से ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

नागपुर से मिले सुराग से पुणे तक पहुंची पुलिस

इस मामले की जांच में पुलिस को अहम सुराग उस समय मिला, जब नागपुर में गिरफ्तार दो महिला आरोपियों से पूछताछ की गई। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और दोनों से मिली जानकारी के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश शुरू की। इसके बाद टीम ने पुणे में करीब एक सप्ताह तक डेरा डालकर संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी।

पुलिस को पता चला कि गिरोह के सदस्य खंडाला के एक रिसॉर्ट में मौजूद हैं। यहां वे वाराणसी निवासी एक व्यक्ति से करोड़ों रुपये लेकर उसे दोगुना करने की तैयारी में थे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।

4 करोड़ से ज्यादा नकद और ठगी का सामान बरामद

छापे के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 4 करोड़ रुपये से अधिक नकद, 17 मोबाइल फोन, मुद्रा नोटों के आकार में काटे गए काले कागज, कांच की प्लेटें, केमिकल और अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि इन्हीं सामानों का इस्तेमाल आरोपियों द्वारा ठगी के दौरान प्रदर्शन करने के लिए किया जाता था।

गिरोह के सदस्य पहले होटल या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर संभावित शिकार से मुलाकात करते थे। वहां असली नोटों और केमिकल का इस्तेमाल कर ऐसा प्रदर्शन किया जाता था, जिससे पीड़ित को विश्वास हो जाए कि काले या खराब नोटों को दोबारा असली मुद्रा में बदला जा सकता है।

केमिकल, जांच और सरकारी मंजूरी के नाम पर लेते थे किस्तों में रकम

विश्वास हासिल करने के बाद आरोपी पीड़ित से अलग-अलग किस्तों में रकम मांगते थे। कभी केमिकल मंगाने, कभी उसकी जांच कराने तो कभी सरकारी अनुमति और दूसरी औपचारिकताओं के नाम पर पैसे लिए जाते थे। रकम मिलने के बाद आरोपी संपर्क से बचने लगते या नए बहाने बनाकर और पैसे मांगते थे।

पुलिस के मुताबिक गिरोह के तीन सदस्य—ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी (46), प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन/शेट्टी/रेड्डी (52) और मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर (55)—को गिरोह का मुख्य संचालक माना जा रहा है। प्रवीण कुमार ‘कैप्टन’ और मनोज कुमार ‘बड़े सर’ के नाम से काम करता था।

सात आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया

पुलिस ने ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, मनोज कुमार श्रीवास्तव के अलावा विवेक सिंह (48), शुभम पांडे (37), योगेंद्र चौहान (48) और बालमुकुंद दीक्षित (40) को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया है।

इससे पहले नागपुर मामले में कनीज फातमा उर्फ भावना पांडे (24) और दीपिका पालीवाल (24) को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, गिरोह के कुछ सदस्य पहले मुंबई और वाराणसी में भी जेल जा चुके हैं।

तेलीबांधा थाने में मामला दर्ज

मामले में रायपुर के तेलीबांधा थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी और धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ठगी के नेटवर्क तथा पीड़ितों की संख्या के संबंध में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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