अन्य साथी भागकर बच निकले; प्रतिबंधित है 31 अक्टूबर तक जंगल में प्रवेश
बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) के प्रतिबंधित जंगल क्षेत्र में पिहरी (जंगली मशरूम) बीनने गए एक युवक की बाघिन के हमले में मौत हो गई। सोमवार सुबह बांधा गांव के पांच युवक जोगीपुर रेंज के पाड़ाडोंगरी इलाके में पहुंचे थे। इसी दौरान दो शावकों के साथ मौजूद बाघिन ने उन्हें दौड़ा लिया। चार युवक किसी तरह भागकर सुरक्षित निकल गए, लेकिन धर्मजीत धृतलहरे को बाघिन ने पकड़ लिया। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, तखतपुर पुलिस इलाके के बांधा निवासी धर्मजीत धृतलहरे, पिता राजेंद्र, सोमवार सुबह करीब 7 बजे भानुप्रताप पिता नवरंग, शिवशंकर ध्रुव पिता रामसिंह, दशरथ धृतलहरे पिता राजेंद्र और रामफल धृतलहरे पिता गायाप्रसाद के साथ जंगल गया था। सभी पिहरी बीनने के लिए जोगीपुर रेंज के पाड़ाडोंगरी क्षेत्र में पहुंचे थे।
इसी दौरान जंगल में दो शावकों के साथ मौजूद बाघिन की नजर युवकों पर पड़ गई। बाघिन ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। खतरा भांपकर अन्य युवक भाग निकले, लेकिन धर्मजीत बाघिन की चपेट में आ गया। साथी युवकों ने गांव पहुंचकर घटना की जानकारी उसके परिजनों को दी।
वन विभाग की टीम ने मौके से बरामद किया शव
घटना की सूचना मिलते ही अचानकमार टाइगर रिजर्व के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। तलाश के दौरान धर्मजीत का शव जंगल में मिला। प्रारंभिक जांच में उसके गले पर गंभीर चोट के निशान पाए गए हैं। वन विभाग ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
एटीआर लोरमी बफर क्षेत्र के रेंज अधिकारी ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। लोरमी थाना प्रभारी और जुनापारा पुलिस चौकी प्रभारी को भी घटना की सूचना दी गई है। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी 25 अगस्त को घटनास्थल का निरीक्षण करेंगे।
एटीआर के एसडीओ समीर जोनाथन ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर मौत बाघिन के हमले से होने की पुष्टि हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। बाघिन अभी अपने दोनों शावकों के साथ घटनास्थल के आसपास मौजूद है। ऐसे में ग्रामीणों को जंगल की ओर नहीं जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
31 अक्टूबर तक जंगल में प्रवेश प्रतिबंधित
मालूम हो कि टाइगर रिजर्व के जंगल क्षेत्रों में 15 जून से 31 अक्टूबर तक प्रवेश प्रतिबंधित है। बारिश के मौसम में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। एसटीपीएफ और पैदल गश्ती दल लगातार ग्रामीणों को जंगल में नहीं जाने की समझाइश देते हैं। इसके बावजूद पिहरी बीनने के लिए युवक प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच गए।
घटना के बाद एटीआर प्रबंधन ने बांधा और आसपास के गांवों में मुनादी कराकर लोगों को जंगल में प्रवेश नहीं करने की चेतावनी दी है। विभाग ने अपील की है कि मानसून के दौरान लोग अनावश्यक रूप से जंगल में न जाएं।
बाघों की आवाजाही के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र
अचानकमार टाइगर रिजर्व का छपरवा और लमनी क्षेत्र बाघों की सर्वाधिक गतिविधि वाले संवेदनशील कोर क्षेत्र में शामिल है। यहां घने जंगल, जलस्रोत और सांभर-चीतल जैसे वन्यजीवों की पर्याप्त संख्या होने के कारण बाघों को अनुकूल आवास मिलता है। छपरवा, लमनी, टिंगीपुर, नवागांव, बांधा, निवासपुर और सरही इसके आसपास के प्रमुख गांव हैं।
इसके अलावा बजाग और छिताधार क्षेत्र कान्हा-अचानकमार वन्यजीव गलियारे से जुड़े हैं। यह कॉरिडोर मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व को अचानकमार से जोड़ता है। इस मार्ग पर नर बाघों की आवाजाही अक्सर देखी जाती है।
पहले भी हो चुके हैं मानव-वन्यजीव संघर्ष
अचानकमार क्षेत्र में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। 24 अगस्त 2024 को छांदा गांव के पास एक युवक की बाघ के हमले में मौत हुई थी। वर्ष 2022-23 में छपरवा और लमनी क्षेत्र में ग्रामीणों के बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीवों के साथ मुठभेड़ की घटनाएं सामने आई थीं। जंगल में तेंदूपत्ता और जलाऊ लकड़ी लेने गए ग्रामीणों पर वन्यजीवों के हमले के मामले भी दर्ज हुए हैं।
वर्ष 2018-19 के दौरान कान्हा-अचानकमार कॉरिडोर से गुजर रहे एक नर बाघ ने छाफल गांव के आसपास एक ग्रामीण पर हमला किया था। वहीं 2011-12 में कोर क्षेत्र के कुछ गांवों के विस्थापन के बाद मानव-बाघ संघर्ष की घटनाओं में कुछ समय के लिए कमी दर्ज की गई थी।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि प्रतिबंधित अवधि में जंगल में प्रवेश न करें और वन्यजीवों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर उनके करीब जाने के बजाय तत्काल वन अमले को सूचित करें।














