CGPSC भर्ती घोटाले के मनी लॉन्ड्रिंग केस में कार्रवाई, सुबह 6 बजे भिलाई पहुंची टीम; दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड खंगाले जा रहे

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की। केंद्रीय जांच एजेंसी ने प्रदेश में एक साथ सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निजी सहायक (PA) रहे केके चंद्रवंशी/चंद्राकर का भिलाई स्थित आवास भी शामिल है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की जा रही है।

सुबह 6 बजे दो गाड़ियों से पहुंची ED की टीम

भिलाई-3 की विश्व बैंक कॉलोनी स्थित केके चंद्रवंशी के आवास पर मंगलवार सुबह करीब 6 बजे ED की टीम पहुंची। विभिन्न स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, करीब पांच से आठ अधिकारियों का दल दो से तीन वाहनों से मौके पर पहुंचा और घर के भीतर तलाशी शुरू की। सुरक्षा के लिए जवानों की तैनाती की गई थी।

अधिकारियों ने आवास में मौजूद दस्तावेजों, फाइलों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। कुछ रिपोर्टों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी पड़ताल किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, तलाशी के दौरान क्या-क्या बरामद या जब्त किया गया, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

CGPSC घोटाले से जुड़ी है ED की जांच

मंगलवार की कार्रवाई को लेकर अब तस्वीर काफी स्पष्ट हो गई है। समाचार एजेंसी PTI के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, ED की यह कार्रवाई CGPSC में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले का हिस्सा है। एजेंसी ने प्रदेश में कुल सात स्थानों पर तलाशी ली है।

ED की जांच वर्ष 2020 और 2021 की CGPSC राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोपों से जुड़ी है। एजेंसी का मनी लॉन्ड्रिंग केस 2024 में CBI द्वारा दर्ज की गई FIR से निकला है।

पूर्व CGPSC अध्यक्ष सोनवानी की गिरफ्तारी के बाद तेज हुई जांच

इस मामले में ED ने 25 जुलाई 2026 को CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया था। ED की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तारी 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में हेरफेर से संबंधित PMLA जांच के तहत की गई थी। विशेष PMLA अदालत ने उन्हें प्रारंभिक तौर पर सात दिन की ED हिरासत में भेजा था।

जांच एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों और रिश्वत देने वाले अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए चयन प्रक्रिया में हेरफेर किया गया। जांच में भर्ती नियमों में बदलाव और कथित वित्तीय लेन-देन के पहलू की भी पड़ताल की जा रही है।

पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप

CGPSC मामले की मूल जांच में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020-21 की भर्ती प्रक्रिया में प्रश्नपत्र लीक करने और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने का नेटवर्क काम कर रहा था। ED के अनुसार, कथित तौर पर अवैध लाभ के बदले चयन में मदद की गई।

जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि 2021 में भर्ती नियमों में बदलाव कर परिवार की परिभाषा से ‘भतीजे’ शब्द हटाया गया। ED का दावा है कि इस बदलाव से कुछ रिश्तेदारों के चयन का रास्ता आसान हुआ। एजेंसी ने कथित रिश्वत की रकम को नकद और CSR दान जैसे माध्यमों से घुमाए जाने की आशंका भी जताई है।

एक मामले में ED ने लगभग 45 लाख रुपये के कथित लेन-देन की भी बात कही है, जिसे दो उम्मीदवारों के डिप्टी कलेक्टर पद पर चयन को प्रभावित करने के बदले कथित तौर पर CSR दान के माध्यम से भेजे जाने का आरोप है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसियों के हैं और इनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी।

CBI की FIR से शुरू हुआ था मामला

CGPSC भर्ती मामले में CBI ने वर्ष 2024 में FIR दर्ज की थी। केंद्र सरकार के PIB के अनुसार, CBI की FIR में आरोप था कि 2020 से 2022 के बीच भर्ती प्रक्रिया की निगरानी कर रहे तत्कालीन आयोग अधिकारियों ने परीक्षा और इंटरव्यू प्रक्रिया को प्रभावित कर अपने बच्चों तथा रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाया।

2021 की भर्ती प्रक्रिया में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए थे। PIB के अनुसार, 1,29,206 अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा दी, जिनमें से 2,548 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए चुने गए। इनमें 509 अभ्यर्थी इंटरव्यू तक पहुंचे और अंततः 170 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। जांच एजेंसियां चयनित अभ्यर्थियों में अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों की भूमिका की भी जांच कर चुकी हैं।

केके चंद्रवंशी का नाम आने से बढ़ी राजनीतिक हलचल

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ PA के रूप में काम कर चुके केके चंद्रवंशी के आवास पर ED की कार्रवाई ने मामले को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि, सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री के साथ उनके पूर्व प्रशासनिक संबंधों के आधार पर किसी व्यक्ति को मामले में आरोपी मानना उचित नहीं होगा।

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक और समाचार एजेंसी की जानकारी में चंद्रवंशी की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ED की तलाशी का उद्देश्य कथित CGPSC घोटाले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और संभावित मनी ट्रेल की जांच करना बताया गया है। आगे की स्थिति तलाशी के बाद एजेंसी की कार्रवाई और आधिकारिक बयान से स्पष्ट होगी।

सात ठिकानों पर कार्रवाई, आगे और खुलासे की संभावना

मंगलवार की कार्रवाई को CGPSC मामले में ED की जांच के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। एजेंसी ने राज्य में सात स्थानों पर एक साथ तलाशी ली है। हालांकि, अन्य सभी ठिकानों और वहां की कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया गया है।

ED की कार्रवाई के दौरान किसी गिरफ्तारी, जब्ती या बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के आधार पर मामले में नए नाम और वित्तीय लेन-देन सामने आने की संभावना है।

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