बिलासपुर। झीरम घाटी नक्सली हमले की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित नए जांच आयोग के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई दो सप्ताह के लिए टल गई है। मामला मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ में सूचीबद्ध था।
सुनवाई टलने की एक वजह मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के कार्यकाल का अंतिम दिन होना भी बताया गया है।
धरमलाल कौशिक ने नए आयोग पर उठाए सवाल
पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने हाईकोर्ट में PIL दायर कर राज्य सरकार द्वारा झीरम घाटी मामले की दोबारा जांच के लिए गठित नए आयोग की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की है। इस आयोग का गठन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने किया था।
याचिका में तर्क दिया गया है कि झीरम घाटी घटना की जांच के लिए पहले ही एक आयोग गठित किया जा चुका था और वह अपनी जांच पूरी कर चुका है। ऐसे में उसी घटना की दोबारा जांच के लिए नए आयोग के गठन की जरूरत पर सवाल उठाया गया है।
पहले ही मिल चुकी है अंतरिम राहत
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने नए जांच आयोग की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके कारण नए आयोग की आगे की जांच प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी है।
अब दो सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई में नए आयोग के गठन की वैधानिकता और दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे सुनवाई होने की संभावना है।
झीरम हमले में गई थी कई नेताओं और जवानों की जान
25 मई 2013 को हुए झीरम घाटी नक्सली हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल सहित कई नेताओं और सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई थी।
मामले में प्रभावित परिवारों की ओर से भी हस्तक्षेप याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने प्रभावित परिवारों की ओर से पक्ष रखा है। उनका तर्क है कि आयोग जांच आयोग अधिनियम के तहत राज्य या केंद्र सरकार को परिस्थितियों के अनुसार नया जांच आयोग गठित करने का अधिकार है।
अब इस महत्वपूर्ण मामले में अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।














