ईडी के मुताबिक व्यवसायी के बेटे और बहू को 2021 राज्य सेवा परीक्षा में फायदा पहुंचाने के बदले राशि दी गई; मामले में कुल 3.28 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित रकम चिन्हित

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की 2020-21 भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच अब धनशोधन के आरोपों तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में मामले में पहली अभियोजन शिकायत दाखिल की है। इसमें पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। 99 पन्नों की शिकायत के साथ करीब 3,700 पन्नों के दस्तावेज अदालत में पेश किए गए हैं।

ED का आरोप है कि 2021 की राज्य सेवा परीक्षा में एक व्यवसायी के बेटे और बहू को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने के बदले सोनवानी के नियंत्रण वाली संस्था ग्रामीण विकास समिति (GVS) को 45 लाख रुपये मिले। यह राशि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंडिंग के रूप में दिखाई गई थी। एजेंसी के अनुसार भुगतान दो किस्तों में—20 लाख और 25 लाख रुपये—किया गया।

बेटे और बहू का तीसरी और चौथी रैंक पर चयन

अभियोजन शिकायत के अनुसार यह राशि कारोबारी श्रवण कुमार गोयल से जुड़ी कंपनी श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के CSR माध्यम से GVS तक पहुंची। ED का दावा है कि इसके बदले गोयल के बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को 2021 राज्य सेवा परीक्षा में फायदा पहुंचाया गया। दोनों का चयन क्रमशः तीसरी और चौथी रैंक पर हुआ।

जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि सोनवानी के कुछ रिश्तेदारों का चयन भी उच्च प्रशासनिक पदों के लिए हुआ। हालांकि इन चयन मामलों और उनसे जुड़े आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।

उम्मीदवारों से 3.13 करोड़ रुपये लेने का भी आरोप

ED ने कथित अवैध रकम के दूसरे स्रोत के रूप में उम्मीदवारों और उनके परिवारों से वसूली का उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार करीब 3.13 करोड़ रुपये इस माध्यम से एकत्र किए गए। आरोप है कि उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र पहले उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर 50 से 60 लाख रुपये तक मांगे जाते थे। इस तरह एजेंसी ने अब तक कुल 3.28 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित रकम चिन्हित की है।

ED के मुताबिक बैंक खातों में दिखाई देने वाली कुछ रकम इसी 3.13 करोड़ रुपये का हिस्सा थी, इसलिए उसे अलग से अतिरिक्त अपराध की कमाई नहीं माना गया है।

सात लोगों को बनाया गया आरोपी

अभियोजन शिकायत में पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के अलावा कारोबारी श्रवण गोयल, तत्कालीन CGPSC उपनियंत्रक परीक्षा ललित गनवीर, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर, चिकित्सक डॉ. विकास चंद्राकर और अतिरिक्त कलेक्टर चेतन बोरघरिया के नाम शामिल हैं। बोरघरिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में OSD भी रह चुके हैं। ED ने उन्हें सितंबर में गिरफ्तार किया था।

CBI की जांच से आगे बढ़ा मामला

CGPSC भर्ती मामले में पहले से CBI जांच चल रही है। CBI ने 2025 में आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किए थे। जनवरी 2026 में सामने आई CBI की अंतिम चार्जशीट में 29 आरोपियों के नाम शामिल किए गए थे। CBI ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित प्रश्नपत्र लीक, चयन में हेरफेर और कुछ प्रभावशाली उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए थे।

ED की मौजूदा कार्रवाई इसी व्यापक मामले से जुड़े धनशोधन पहलू की जांच पर केंद्रित है। एजेंसी के आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध होना अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

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