इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी महोत्सव में शामिल हुए, राधा-कृष्ण की पूजा कर किया शंख अभिषेक

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर के टाटीबंध स्थित राधा रासबिहारी जी मंदिर (इस्कॉन) में आयोजित भव्य कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में हिस्सा लिया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा-अर्चना की तथा शंख अभिषेक कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेशवासियों और मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का पूरा जीवन मानव समाज को धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण द्वारा दिया गया कर्मयोग का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। यह संदेश जीवन की चुनौतियों के बीच अपने कर्तव्य के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण का उत्सव नहीं है, बल्कि उनके जीवन-दर्शन और आदर्शों को आत्मसात करने का अवसर भी है। श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और समाज के कमजोर वर्गों के साथ खड़े रहने का संदेश दिया। उनके विचारों ने सदियों से भारतीय समाज को दिशा दी है।

महामंत्र के जाप से गूंजा मंदिर परिसर

जन्माष्टमी समारोह के दौरान इस्कॉन मंदिर परिसर भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के दर्शन किए। मंदिर परिसर में हरे कृष्ण महामंत्र का सामूहिक जाप हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री साय भी श्रद्धालुओं के साथ शामिल हुए।

उन्होंने वृंदावन बिहारी लाल के प्राकट्य उत्सव पर भगवान का आशीर्वाद लिया। भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

छत्तीसगढ़ की धार्मिक विरासत को संवारने पर जोर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन काल से धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की समृद्ध परंपरा से जुड़ी रही है। यह माता कौशल्या की जन्मभूमि और भगवान राम के ननिहाल के रूप में विशेष धार्मिक महत्व रखती है। प्रदेश के मंदिरों, तीर्थस्थलों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत में इसकी पहचान दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भोरमदेव, गंधेश्वर महादेव, मधेश्वर महादेव और कुलेश्वर महादेव जैसे शिव मंदिर तथा मां बम्लेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, मां दंतेश्वरी और मां चंद्रहासिनी जैसे शक्तिपीठ छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक पहचान को समृद्ध करते हैं। इन स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार करने और उन्हें भव्य स्वरूप देने का काम लगातार किया जा रहा है।

भोरमदेव क्षेत्र में करीब 150 करोड़ रुपये से विकास

मुख्यमंत्री ने बताया कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले भोरमदेव मंदिर क्षेत्र का विकास करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से ‘प्रसाद’ योजना के तहत किया जा रहा है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी पैदा होंगे।

उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास से केवल प्रदेश की विरासत मजबूत नहीं होती, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है। इससे युवाओं, स्व-सहायता समूहों, छोटे कारोबारियों और कारीगरों के लिए रोजगार तथा आय के अवसर बढ़ते हैं।

50 हजार से अधिक श्रद्धालु कर चुके रामलला के दर्शन

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आस्था समाज की बड़ी शक्ति है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक या अन्य किसी कारण से कोई श्रद्धालु तीर्थ यात्रा की अपनी इच्छा से वंचित न रहे।

उन्होंने बताया कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद छत्तीसगढ़ के लोगों में अयोध्या धाम जाने को लेकर काफी उत्साह है। राज्य सरकार की रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालुओं को अयोध्या की यात्रा कराई जा रही है। अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं।

इसी तरह मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के बुजुर्गों को देश के प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा का अवसर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर बुजुर्गों की लंबे समय से चली आ रही तीर्थ यात्रा की इच्छा पूरी होना सरकार के लिए भी संतोष का विषय है।

धार्मिक स्थलों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की कोशिश

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्रों को बेहतर सुविधाओं से लैस कर विकसित करने का उद्देश्य उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाना है। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए रास्ते खुलेंगे तथा प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत होगी।

3 से 5 सितंबर तक चल रहा जन्माष्टमी महोत्सव

इस्कॉन रायपुर के 26वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर कृष्ण जन्माष्टमी का भव्य महोत्सव 3 से 5 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है।

समारोह में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, इस्कॉन रायपुर के पदाधिकारी, संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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